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पिथौरागढ़ की ऐतिहासिक हिलजात्रा में लखिया भूत का दिखा रौद्र रूप, सोर घाटी में उमड़ा जनसैलाब
पिथौरागढ़ के कुमौड़ में ऐतिहासिक हिलजात्रा पर्व धूमधाम से मनाया गया। भगवान शिव के गण लखिया भूत के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
पिथौरागढ़। कुमौड़ गांव में सोमवार को प्रसिद्ध लोक पर्व ‘हिलजात्रा’ पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सोर घाटी के इस ऐतिहासिक आयोजन में भगवान शिव के गण माने जाने वाले ‘लखिया भूत’ की एक झलक पाने के लिए मैदान में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जैसे ही शाम को लखिया भूत ने मैदान में प्रवेश किया, पूरा क्षेत्र उनके जयकारों और पुष्प वर्षा से गुंजायमान हो उठा।
हिलजात्रा को लेकर सुबह से ही स्थानीय लोगों और पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। दोपहर तीन बजे से ही कुमौड़ के मुख्य मैदान के आसपास हजारों की संख्या में लोग जुटने शुरू हो गए थे। यह पर्व न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि पहाड़ी जीवन के संघर्ष, कृषि-पशुपालन और ग्रामीण संस्कृति का जीवंत प्रतीक भी माना जाता है।
कार्यक्रम के दौरान शाम को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअली जुड़कर कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने आयोजक समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि 500 वर्षों से भी अधिक पुरानी यह परंपरा पिथौरागढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व मां गौरा और भगवान महेश्वर की पारंपरिक पूजा के साथ जुड़ा हुआ है और हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है।
हिलजात्रा का यह पारंपरिक आयोजन हर साल सातूं-आठूं पर्व के बाद कृषि चक्र और खुशहाली के प्रतीक के रूप में आयोजित किया जाता है। लखिया भूत के अलावा इसमें हलवाहे, बैल और धान रोपाई से जुड़े विभिन्न लोक पात्रों का अभिनय भी प्रस्तुत किया गया। देर शाम तक चले इस सांस्कृतिक महोत्सव का समापन लखिया भूत के आशीर्वाद और सुरक्षा के संकल्प के साथ हुआ।
