Report by : CWN Desk
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‘सुख़न का आशिया’ गोष्ठी में राष्ट्रकवि को स्वरांजलि, आदिवासी बालिका की मदद

‘सुख़न का आशिया’ संस्था ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर ऑनलाइन गोष्ठी की। कवियों ने 7 वर्षीय आदिवासी बालिका की शिक्षा के लिए ₹10,500 भेंट किए।

छत्तीसगढ़। साहित्य और समाज सेवा का एक अनोखा संगम हाल ही में देखने को मिला। ‘सुख़न का आशिया’ संस्था के तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती के अवसर पर एक भव्य राष्ट्रीय ऑनलाइन साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में देशभर के प्रमुख साहित्यकारों ने भाग लिया और राष्ट्रकवि को अपनी रचनाओं के माध्यम से भावपूर्ण स्वरांजलि अर्पित की।
इस साहित्यिक कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका सामाजिक सरोकार रही। संस्था और कवियों ने मिलकर छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ग्राम चरभट्टी की 7 वर्षीय आदिवासी बालिका ‘चांदनी’ की पढ़ाई के लिए ₹10,500 की आर्थिक सहायता राशि जुटाई। यह सहयोग राशि 3 अगस्त को बालिका के परिवार को सौंपी गई ताकि उसकी शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
ऑनलाइन काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कांकेर की प्रसिद्ध कवयित्री व समाज सेविका ममता साहू ने की, जबकि बिहार के वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का सफल संचालन बाड़मेर के केविन चौहान ने किया। गोष्ठी की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना और स्वागत गीतों के साथ हुई। इस दौरान कवयित्री साधना शाही का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया गया।
काव्य पाठ सत्र में कृष्ण कुमार चंद्रा, केविन चौहान, डॉ. संजीदा खानम शाहीन और मेघा अग्रवाल की रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा सुरभि शुक्ला, गरिमा लखनवी, सावित्री नेताम और काजल वर्मा ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं। अध्यक्ष ममता साहू की समीक्षा को सभी ने सराहा।

‘सुख़न का आशिया’ गोष्ठी में राष्ट्रकवि को स्वरांजलि, आदिवासी बालिका की मदद
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