अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
रूस में फंसे उत्तराखंड के 2 भाई लौटे स्वदेश, सीएम धामी का जताया आभार
रूस में 97 दिनों से फंसे पिथौरागढ़ के आनंद सिंह व भूपेंद्र सिंह कार्की सकुशल भारत लौट आए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी के त्वरित हस्तक्षेप से यह संभव हुआ।
पिथौरागढ़। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप से रूस में पिछले 97 दिनों से फंसे पिथौरागढ़ के दो भाइयों की सुरक्षित वतन वापसी हो गई है। आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की मंगलवार को सकुशल अपने घर लौट आए। दोनों भाइयों के सकुशल भारत पहुंचते ही उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दूरभाष पर दोनों युवकों से बात की और उनका हालचाल जाना।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों भाइयों को बेहतर रोजगार का झांसा देकर एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से रूस भेजा गया था। नौकरी के नाम पर उनसे आठ लाख रुपये लिए गए थे। रूस पहुंचने के बाद उन्हें वादे के मुताबिक काम नहीं दिया गया और जबरन कठिन परिस्थितियों में रखा गया। पीड़ित युवकों को वेतन भी नहीं दिया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि जिस क्षेत्र में उन्हें रखा गया था, वहां सुरक्षा का गंभीर खतरा बना हुआ था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उत्तराखंड सरकार ने भारत के विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा। इस दौरान क्षेत्रीय नेताओं और समाजसेवियों ने भी परिवार का लगातार ढांढस बंधाया। आखिरकार सरकार के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों से दोनों भाइयों की भारत वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ।
सुरक्षित वापसी पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विदेश में फंसे हर उत्तराखंडी नागरिक की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है। राज्य सरकार हर नागरिक के हितों की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री धामी और विदेश मंत्रालय का दिल से आभार जताया है। दोनों भाइयों ने वतन वापसी के बाद राहत की सांस ली है। इस तरह के मामलों की जानकारी और सुरक्षा तंत्र से जुड़े उत्तराखंड सरकार के सुरक्षा अभियानों की जानकारी नागरिक ले सकते हैं।
इस घटना ने विदेश में नौकरी दिलाने वाले फर्जी ट्रैवल एजेंटों के बढ़ते जाल को भी उजागर किया है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे विदेश जाने से पहले एजेंटों की जांच जरूर करें। फर्जी दावों में फंसने के बजाय केवल अधिकृत और पंजीकृत माध्यमों से ही विदेश जाएं।
