अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ में रैबीज का दूसरा संदिग्ध मामला: पिल्ले के काटने के बाद छात्र की हालत गंभीर
पिथौरागढ़ के धारचूला में रैबीज का एक और संदिग्ध मामला सामने आया है। पिल्ले के काटने के बाद 14 वर्षीय छात्र की हालत गंभीर बनी हुई है, जिसे हायर सेंटर रेफर किया गया है।
पिथौरागढ़। जिले के धारचूला इलाके में रैबीज का एक और बेहद डरावना और संदिग्ध मामला सामने आया है। यहाँ महज 19 दिनों के भीतर रैबीज का यह दूसरा संदिग्ध केस मिलने से स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया है। बुधवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जुम्मा गांव के तोक बुंगा निवासी 14 वर्षीय युवराज सिंह धामी को बीते 28 फरवरी को एक पिल्ले ने काट लिया था। इसके बाद, मई महीने में जब इसी गांव के एक अन्य किशोर की रैबीज के कारण मौत हो गई, तब परिजनों ने डरकर 26 मई को युवराज को एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाई थी। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी और बुधवार सुबह अचानक युवराज की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई।
परिजनों ने बताया कि बुधवार सुबह से ही युवराज को पानी और हवा से अचानक बहुत तेज डर लगने लगा था। इसके साथ ही वह बार-बार जोर-जोर से चिल्ला रहा था और उसके मुंह से लगातार लार निकल रही थी, जो कि रैबीज के बेहद क्लासिक लक्षण हैं। आनन-फानन में परिजन उसे पिथौरागढ़ जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उसका इलाज शुरू किया।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉ. आशु अवस्थी ने मरीज का प्राथमिक उपचार किया। उन्होंने मीडिया को बताया कि किशोर में दिखाई दे रहे सभी लक्षण पूरी तरह से रैबीज से मिलते-जुलते हैं। छात्र की बेहद नाजुक और गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत हायर सेंटर रेफर कर दिया है।
इस घटना के बाद से पूरे धारचूला और पिथौरागढ़ क्षेत्र के लोगों में भारी डर का माहौल बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जानवर के काटने के तुरंत बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि लक्षण दिखने के बाद इलाज नामुमकिन हो जाता है। स्थानीय प्रशासन ने भी अब क्षेत्र में आवारा और संदिग्ध जानवरों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
