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उत्तराखंड पुलिस

दीवाली की रौनक के बीच AI का खतरा: साइबर ठग हुए सक्रिय, अपनाए ठगी के नए खतरनाक तरीके

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दीवाली की रौनक के बीच देहरादून में AI का इस्तेमाल कर रहे साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं। फर्जी ऑफर, क्लोन वेबसाइट और अनजान लिंक से सावधान रहें। STF ने बचने के उपाय और डिजिटल सतर्कता की अपील की।

देहरादून। जैसे-जैसे दीवाली का त्योहार नजदीक आ रहा है, दून बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीदारी की रौनक बढ़ती जा रही है। लेकिन, इसी चहल-पहल के बीच साइबर ठग भी अपनी गतिविधियां तेज कर चुके हैं। इस बार साइबर ठगों ने पारंपरिक फर्जी ऑफर्स और नकली लिंक्स की सीमाओं को पार करते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ठगी को और भी खतरनाक बना दिया है।


ऑनलाइन शॉपिंग और AI का इस्तेमाल (Online Shopping and Use of AI)
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग, गिफ्ट्स, कैशबैक और भारी छूट के नाम पर लोगों को लुभाया जा रहा है। अब साइबर ठग AI टूल्स का उपयोग करके लोगों की शॉपिंग हिस्ट्री, सोशल मीडिया एक्टिविटी और सर्च पैटर्न का विश्लेषण करते हैं। इसके आधार पर, वे शिकार को बिल्कुल व्यक्तिगत (Personalized) ईमेल या मैसेज भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन फर्जी लिंक पर क्लिक कर अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी भरता है, वह तुरंत साइबर ठगी का शिकार हो जाता है।
यात्रा और फर्जी बुकिंग पोर्टल्स (Fake Travel and Booking Portals)
दीवाली और छठ जैसे त्योहारों पर ट्रेनों और बसों की भारी मांग को देखते हुए, साइबर ठग क्लोन वेबसाइट्स भी बना रहे हैं। ये वेबसाइट्स असली बुकिंग पोर्टल की हूबहू नकल होती हैं। टिकट बुक करने की जल्दबाजी में लोग इन फर्जी साइट्स पर भुगतान कर देते हैं, जिससे उनके पैसे डूब जाते हैं। एसटीएफ के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने कहा कि ठग त्योहारों के दौरान इंटरनेट पर भारी छूट और आकर्षक ऑफर वाली पोस्ट डालते हैं, जिनसे हमें सतर्क रहना है।
ऐसे बरतें सावधानी और करें सुरक्षा (How to Be Careful and Ensure Safety)
साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ सावधानियां बहुत जरूरी हैं। हमेशा ध्यान दें कि खरीदारी से पहले वेबसाइट का यूआरएल https:// से शुरू होता हो, और स्पेलिंग की गलती पर ध्यान दें। कोई भी ऐप या सॉफ्टवेयर केवल ऑफिशियल प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करें। अनजान स्रोत से भेजी गई एपीके फाइल को कभी इंस्टॉल न करें, और अनजान क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले सोचें। ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत करें।

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