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भक्ति की पुष्टि तभी होती है जब श्रद्धा और विश्वास जीवन में हो : उमेश चंद्र शास्त्री

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हरिद्वार- सनातन ज्ञानपीठ सेक्टर 1शिव् मंदिर भेल हरिद्वार द्वारा 11वां शिव महापुराण कथा के अंतरगत छठे दिवस में पूज्य पंडित श्री उमेश चंद्र शास्त्री जी महाराज ने बताया कि भक्ति की पुष्टि तभी होती है जब श्रद्धा और विश्वास जीवन में हो इन दोनों के बिना कथा अधूरी है। पूजा अधूरी है बिना विश्वास के बिना श्रद्धा के मां सती ने कथा सुनी तो परिणाम गोस्वामी जी ने सम्मान वापस ले लिया।इतना ही नहीं भगवान पर उनके दर्शन पर विश्वास नहीं किया तब क्या हुआ।

जिस व्यक्ति मै श्रद्धा नहीं है विश्वास नहीं है,वो जीवन नष्ट ही हो जाता है : उमेश चंद्र शास्त्री

माँ सती को जलना पड़ा तो कथा ये कहना चाहती है, जिस व्यक्ति मै श्रद्धा नहीं है विश्वास नहीं है,वो जीवन नष्ट ही हो जाता है।एक दिन क्योकि कथा के प्रति श्रद्धा विश्वास है हमारे जीवन के संशय कों नष्ट करता है संशय मिटाने की औषधि ही कथा है अर्थात कथा श्रद्धा और विश्वास के साथ सुने ,जीवन में श्रद्धा नहीं है तो विश्वास को भटकना पड़ता है और जीवन में विश्वास नहीं है तो श्रद्धा को जलना पड़ता है ।इसलिए तो शिव की वाणी पर शिव पर भगवान पर विश्वास नहीं किया तो मां सती को परिणाम स्वरूप जलना पड़ा ,और विश्वास के अंदर से जब श्रद्धा जल गई तो विश्वास को भटकना पड़ा जीवन में श्रद्धा विश्वास ही शिव शक्ति का मिलन कराती है
आज कथा में शिव पार्वती के विवाह की कथा सुनाते हुए व्यास जी ने बताया कि आज श्रद्धा और विश्वास का मिलन हुआ है शिव और शक्ति का मिलन हुआ है तो परिणाम स्वरूप फिर जीवन में पुरुषार्थ् प्रगट होता है।जीवन मै विवेक प्रगट होता है। इसीलिए आपने जीवन के श्रद्धा विश्वास को जगाएं क्योंकि इसी कारण तो आज आए दिन पति-पत्नी में तलाक हो रहे हैं आपस में वियोग हो रहा है क्योंकि जीवन में न श्रद्धा है न ही विश्वास है और जिसके जीवन में श्रद्धा नहीं है विश्वास नहीं है उसका जीवन नष्ट हो जाता है जिसके पास श्रद्धा विश्वास है वही व्यक्ति सफल होता है और हम अपने जीवन में श्रद्धा विश्वास को जगाएंगे तो भक्ति प्रकट होगी, भक्ति प्रकट होगी तो शिव प्रगट होंगे क्योंकि शिव भक्ति के आधीन है इस प्रकार शिव विवाह बड़ी ही धूमधाम के साथ शिव मंदिर में मनाया गया।
कथा में मंदिर सचिव ब्रिजेश शर्मा कथा के मुख्य यजमान राजीव ओर मीनाक्षी,जयप्रकाश,आदित्य गहलोत,राकेश मालवीय,रामकुमार,तेजप्रकाश,दिलीप गुप्ता,अनिल चौहान,सुनील चौहान,महेश, विष्णु,मानदाता,होशियार सिंह,चंद्रभान,दिनेश,मूला सिंह,अलका,संतोष,पुष्पा,कुसुम,सरला,अंजू,मंजू,डोली,विभा गौतम,भावना,अनपूर्णा,राजकिशोरी मिश्रा,रेनू शर्मा,अर्चना,कौशल्या,सुमन विनोद देवी अनेको श्रोता उपस्थित रहे।

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