Report by : CWN Desk
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युवाओं में बढ़ता मानसिक संकट: एम्स के सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा, 25% छात्र अवसाद के शिकार

सोशल मीडिया का दबाव और करियर की असुरक्षा युवाओं को ले जा रही है अवसाद की ओर। एम्स के ‘युवा जोश’ अभियान के अध्ययन में सामने आए डराने वाले आंकड़े। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

ऋषिकेश। आज के दौर में गलाकाट प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया ने युवाओं को एक गहरे मानसिक संकट में धकेल दिया है। एम्स (AIIMS) के सोशल आउटरीच सेल द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि देश के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग 25 प्रतिशत छात्र अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि आईआईटी और एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र भी आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।
सोशल आउटरीच सेल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष ने ‘युवा जोश’ अभियान के तहत 7 हजार से अधिक छात्रों के बीच शोध किया है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर दूसरों की सफलता से अपनी तुलना करने की दौड़ ने युवाओं में हीनभावना और असुरक्षा पैदा कर दी है। युवा अक्सर करियर की चिंता, पारिवारिक अपेक्षाओं और प्रेम प्रसंगों के कारण मानसिक तनाव के जाल में फंस रहे हैं, जिससे निकलने का रास्ता उन्हें नहीं सूझता।
सरकारी आंकड़े इस “मौन आपातकाल” की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2018 से 2023 के बीच आईआईटी और आईआईएम जैसे शीर्ष संस्थानों में 60 छात्रों ने अपनी जान गंवाई। वहीं, मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और रेजिडेंट्स के बीच आत्महत्या का यह आंकड़ा 120 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सफलता को केवल अंकों से मापना बंद नहीं किया जाएगा, तब तक यह संकट कम नहीं होगा।
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एम्स में आगामी 25 मार्च को नेशनल यूथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। ‘युवा जोश’ पहल के तहत होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के मेडिकल छात्र जुटेंगे। डॉ. संतोष ने बताया कि इस एकदिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युवाओं की मानसिक और वित्तीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान तलाशना और उनमें जागरूकता पैदा करना है।

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