Report by : CWN Desk
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संस्कार भारती ने किया कलागुरुओं का सम्मान, नटराज पूजन में दिखी भव्य सांस्कृतिक छटा

संस्कार भारती हरिद्वार ने नटराज पूजन व कला गुरु सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया। विधायक आदेश चौहान ने गुरु-शिष्य परंपरा को संस्कृति की नींव बताया।

हरिद्वार। संस्कार भारती की हरिद्वार महानगर इकाई ने खेल एवं सांस्कृतिक महासंघ के सहयोग से भेल स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में नटराज पूजन और ‘कला गुरुजन सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन किया। इस सांस्कृतिक संध्या में संगीत, नृत्य और गुरु-शिष्य परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और नटराज पूजन के साथ हुआ।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा ही भारतीय संस्कृति की असली आधारशिला है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अपनी संस्कृति, कला और परंपराओं का संरक्षण व संवर्धन करना हम सभी का पहला कर्तव्य है। दुनिया भर में भारत की पहचान आज भी इसके समृद्ध संस्कारों से ही होती है।
कार्यक्रम के दौरान कई मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। बाल कलाकारों की गणेश वंदना, देव श्री चक्रबर्ती और वंदिता के शास्त्रीय कथक नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसके साथ ही ‘मेरे वतन के लोगों’ और ‘संदेशे आते हैं’ जैसे देशभक्ति गीतों की धुनों पर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
संस्था ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 13 कला गुरुओं को सम्मानित किया। इसमें योग, संगीत, कथक, साहित्य, चित्रकला और नाट्य कला के दिग्गजों को शॉल, मोती माला और सम्मान पत्र भेंट किए गए। इसके अलावा, शिक्षा, खेल और संस्कृति सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों को भी विशेष सम्मान दिया गया।
विशिष्ट अतिथि आचार्य करुणेश मिश्र ने कहा कि आज समाज को प्रगति से अधिक सद्गति और संस्कारों की आवश्यकता है। अंत में संस्कार भारती की नई महानगर कार्यकारिणी की घोषणा की गई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम्’ के साथ शांतिपूर्वक हुआ।

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