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हरिद्वार

रुड़की-मंगलौर हाईवे पर भीषण हादसे: कांवड़ यात्रा के दौरान 4 कांवड़ियों की दर्दनाक मौत

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रुड़की और मंगलौर के पास हाईवे पर हुए अलग-अलग हादसों में 4 कांवड़ियों की मौत हो गई। मृतकों में शामली और बड़ौत के कांवड़िए शामिल हैं। पुलिस जांच में जुटी।

हरिद्वार। उत्तराखंड के रुड़की और मंगलौर क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर भीषण सड़क हादसे सामने आए हैं। रविवार को हुए अलग-अलग हादसों में चार कांवड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक स्कूटी सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतकों में उत्तर प्रदेश के शामली और बड़ौत निवासी कांवड़िए भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल रुड़की भेज दिया है।


पहला दर्दनाक हादसा रविवार देर शाम हरिद्वार-मंगलौर बाईपास पर रिमझिम ढाबे के पास हुआ। यहाँ एक बुलेट और बाइक की आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे में बाइक सवार दो कांवड़िए संदीप मलिक (35) और विपिन (40), निवासी किवाना (थाना कांधला, शामली), गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फानन में दोनों को रुड़की के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसी दुर्घटनास्थल के समीप कार और स्कूटी की टक्कर में स्कूटी चालक घायल हो गया, जिसका उपचार जारी है।
दूसरा हादसा शनिवार देर रात नारसन शिव मंदिर के पास घटित हुआ। यहाँ किसी अज्ञात वाहन ने 25-30 वर्ष की आयु के एक कांवड़िए को जोरदार टक्कर मार दी। राहगीरों की मदद से उसे रुड़की के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मृतक के बैग से 6110 रुपये की नकदी और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है। हालांकि, मोबाइल स्विच ऑफ होने के कारण अभी तक उसकी पहचान स्थापित नहीं हो सकी है।
तीसरी घटना रविवार सुबह लिब्बरहेड़ी क्षेत्र में घटी, जहाँ अज्ञात वाहन की चपेट में आने से 45 वर्षीय कांवड़िए की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस जांच में मृतक की पहचान मांगा, निवासी बड़ौत (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। हाईवे पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं से कांवड़ श्रद्धालुओं में शोक और आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सभी दुर्घटनाओं का संज्ञान लेते हुए अज्ञात वाहनों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी चालकों की तलाश के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है। कांवड़ मार्ग पर यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।

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