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उत्तराखण्ड

वोट डालने गए सही-सलामत, बूथों पर जाकर पता चला वो तो मर चुके हैं, खुद को जिंदा साबित न कर पाने से नहीं डाल पाए वोट

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बीएलओ की लापरवाही से राज्य में कई वोटर मताधिकार से वंचित रहे, मतदान प्रतिशत गिरने की वजहों में लापरवाही भी शामिल
देहरादून।
शुक्रवार को उत्तराखंड की सभी पांच लोकसभा सीटों पर चुनाव हो गया। मतदान मात्र 55.89 फीसदी हुआ है। इसके पीछे कई वजहों को माना जा रहा है। जिनमे बीएलओ की गलतियां भी शामिल हैं। प्रदेश में कई जगहों पर बीएलओ की ओर से मतदाताओं का सत्यापन ही नहीं कराया गया। जिंदा मतदताओं को मृत दिखा दिया और मृत को जिंदा दर्शा दिया। जिंदा लोगों को मृत दर्शाए जाने से कई लोग खुद के जिंदा होना साबित नहीं कर सके और अपना वोट नहीं कर पाए।
शांतिपुरी क्षेत्र के आनंदपुर गांव में सिस्टम की गलती का खामियाजा 15 मतदाताओं को भुगतना पड़ा। ग्रामीण उत्साहित होकर मतदान केंद्र में मत देने पहुंचे तो पता चला कि सूची में वे मृत दर्शाए गए हैं। इससे वे हक्के बक्के रह गए। उन्होंने प्रशासन को सूचना दी। हालांकि वे मतदान नहीं कर पाने की वजह से निराश दिखे।
ग्राम आनंदपुर में वोट डालने पहुंचे 15 लोगों के सामने अजीब की स्थिति पैदा हो गई। इन लोगों को सूची में मृत दर्शाया गया था। इनमें राजकुमार पांडे, नागेंद्र कुमार, विरेशवर सिंह, सूबेदार सिंह, सरदार बहादुर सिंह, वीरेंद्र पांडे, अमित कुमार गुप्ता, पूजा कुशवाहा, अरविंद कुमार, रुद्रप्रताप सिंह, सुग्रीव सिंह, हाल्थर प्रसाद, चरन सहित दो अन्य शामिल रहे। अमित कुमार गुप्ता की चुनावी ड्यूटी भी लगी हुई है और उसको भी सूची में मृत दर्शाया गया था। ग्रामीण विरेश्वर सिंह, राजकुमार पांडे की पत्नियों का देहांत हो चुका है, लेकिन सूची में पत्नियों के साथ उनको भी मृत दर्शाया गया था। रुद्रप्रताप और विरेश्वर सिंह ने बताया कि उनका नाम मृत सूची में होना बड़ी लापरवाही है। बताया कि इस संबंध में स्थानीय प्रशासन को शिकायत की गई थी। इस पर दो सदस्यीय टीम आई थी और उनके नाम दर्ज कर ले गई लेकिन वे अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए, इसका उन्हें दुख है।
सितारगंज वार्ड- छह निवासी शहवान अंसारी ने बताया कि वह जीआईसी में बने बूथ पर वोट डालने पहुंचा। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, इसलिए वह वोट नहीं डाल सका। वहीं, वार्ड नंबर-3 निवासी इश्तियाक अहमद ने कहा कि मतदान पर्ची नहीं होने के कारण वह भी वोट नहीं डाल पाया। इस्लामनगर और वलीनगर के 40 से अधिक लोगों का नाम वोटर लिस्ट से गायब रहा, जिससे वह वोट नहीं डाल पाए।
बाजपुर भाकियू जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष सन्नी निज्जर ने बताया कि शुक्रवार सुबह वह पत्नी के साथ वोट डालने के लिए बेरिया दौलत बूथ पर गए। लेकिन उनके परिवार के 15 नाम मतदाता सूची से गायब मिले। इस कारण वह मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। जिस पर उन्होंने आक्रोश व्यक्त किया है। गांव माहोली जंगल, बेरिया दौलत, मजरा प्रभु सहित अन्य कई बूथों पर लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब मिले। लोगों ने एक साजिश के तहत मतदाता सूची से नाम गायब करने का आरोप लगाया है। देहरादून में भी वोट देने के लिए मतदान केंद्र श्री गुरुराम राय डिग्री कालेज, पथरीबाग के 18 धर्मपुर भंडारी बाग में पहुंची महिला को मतदान ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने यह कहकर लौटा दिया कि मतदाता सूची में तुम्हें मृत घोषित कर दिया गया है।
ऐसे में तुम वोट नहीं दे सकती हो। इस दौरान महिला बच्चे को गोद में लिए तीन घंटे इधर-उधर चक्कर काटती रही, लेकिन उसे वोट डालने नहीं दिया गया।
भंडारी बाग की रहने वाली 33 वर्षीय साहिबा खान हर बार चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करती रही हैं। शनिवार को दोपहर करीब एक बजे वह मतदान करने के लिए श्री गुरुराम राय डिग्री कालेज, पथरीबाग में बने मतदान केंद्र में गईं।
जब उन्होंने अपनी वोटर स्लिप दिखाई तो एक बार तो बूथ पर बैठे कर्मचारी उसे देखकर चौंक गए और कहा कि तुम तो मर चुकी हो। वोट देने के लिए कैसे आ गई। महिला ने कहा कि वह जीवित है। उन्होंने मतदान अधिकारियों को अपने जीवित होने के सभी दस्तावेज भी दिखाए, लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और लौटा दिया।साहिबा खान ने बताया कि डेढ़ साल पहले उनके पति मोहसिन की मृत्यु हो चुकी है। वह घर में ही रहती हैं, लेकिन मतदाता सूची अपडेट करने आए कर्मचारियों ने गलत रिपोर्ट देकर उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुक्रवार को जब वह वोटर स्लिप लेकर मतदान करने पहुंचीं तो देखा कि मतदान केंद्र पर मौजूद सूची में उनके नाम के ऊपर डिलीट की मुहर लगी हुई थी।

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