नई दिल्ली
पाकिस्तान में सेना और सरकार के बीच मतभेद बढ़े, तख्ता पलट की आशंका
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को कम करने के उद्देश्य से अमेरिका की मध्यस्थता में एक सीजफायर समझौता हुआ था। इस पर भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने सहमति जताई थी। लेकिन इस युद्धविराम की घोषणा के महज चार घंटे बाद ही पाकिस्तान ने इसका उल्लंघन कर दिया। पाकिस्तान की सेना ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए भारतीय इलाकों में एक बार फिर से ड्रोन भेजने की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने मुस्तैदी से नाकाम कर दिया।
पाकिस्तानी सेना की इस हरकत से न केवल भारत-पाक संबंधों में फिर से तनाव बढ़ गया है, बल्कि पाकिस्तान के भीतर भी सत्ता संघर्ष के संकेत मिलने लगे हैं। माना जा रहा है कि सेना और सरकार के बीच मतभेद इस हद तक बढ़ गए हैं कि तख्ता पलट की आशंका भी जताई जा रही है।
पाकिस्तानी ड्रोन हमलों के प्रयासों को भारतीय सेना ने राजस्थान के बाड़मेर, पंजाब के फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में विफल कर दिया। इसके बाद फिरोजपुर में एहतियातन ब्लैकआउट घोषित कर दिया गया। शहर में खतरे के सायरन बजने लगे और प्रशासन ने लोगों से घरों में रहने, दुकानों को बंद करने और वाहनों की हेडलाइट बंद करने की अपील की।
पाकिस्तान द्वारा युद्धविराम समझौते के उल्लंघन की शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा (एलओसी) के कई हिस्सों में की गई। इस घटनाक्रम के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और भारतीय सेना को पूरी तैयारी के साथ जवाब देने के निर्देश दिए गए। भारत की ओर से पहले ही यह साफ कर दिया गया था कि अगर पाकिस्तान सीजफायर का उल्लंघन करता है तो उसका सख्ती से जवाब दिया जाएगा।
अब तक राजस्थान के पोखरण और कश्मीर के बारामूला में एक-एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया गया है। इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान की सेना पर उसकी सरकार का नियंत्रण बेहद कमजोर है और यह क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
