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उत्तराखण्ड

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना में अफसरों और परिजनों को नहीं मिलेगा सब्सिडी का लाभ: सरकार ने दिए सख्ती के आदेश

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देहरादून। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत अब सरकारी अधिकारियों और उनके परिजनों द्वारा लगाए जाने वाले सोलर प्लांट्स में सब्सिडी का लाभ नहीं दिया जाएगा। शासन ने योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए यह फैसला लिया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर सख्ती बरतने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना का मकसद गांव में बेरोजगारों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार उपलब्ध कराना है। योजना की शुरुआत के बाद से ही लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। अभी तक 2793 लोगों ने योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया है और इनमें से 164 सोलर प्लांट्स लग भी चुके हैं।

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हालांकि, इस योजना में गड़बड़ियां भी सामने आने लगीं। शासन स्तर पर शिकायतें पहुंची कि योजना के लिए आवेदन करने वालों में ऊर्जा के तीनों निगमों (उरेडा समेत) के इंजीनियर, अधिकारी और उनके परिजन भी शामिल हैं। इन लोगों ने सोलर प्लांट के लिए सब्सिडी का लाभ लेने का प्रयास किया, जो कि योजना के उद्देश्यों के विपरीत है।

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इन शिकायतों के बाद प्रमुख सचिव ऊर्जा ने ऊर्जा के तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों और उरेडा को पत्र लिखकर निर्देश दिए कि ऐसे सभी अधिकारियों और उनके परिजनों को चिन्हित कर सूची बनाई जाए और इन्हें योजना के तहत सब्सिडी का लाभ न दिया जाए।

प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ केवल बेरोजगारों और जरूरतमंदों को ही मिलना चाहिए, ताकि सौर ऊर्जा के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

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