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यमुनोत्री हाईवे पर बादल फटने से तबाही, 2 मजदूरों के शव मिले, 7 लापता
उत्तरकाशी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। यमुनोत्री हाईवे पर पालीगाड़ ओजरी डाबरकोट के बीच सिलाई बैंड के पास बादल फटने से एक निर्माणाधीन होटल स्थल पूरी तरह से तबाह हो गया। इस हादसे में कई मजदूर लापता हो गए, जिसके बाद प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया।
यमुनोत्री हाईवे पर बादल फटने से तबाही, बचाव कार्य जारी
उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर जारी है। देर रात करीब 12 बजे उत्तरकाशी जिले के यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड के पास बादल फटने की घटना हुई, जिससे इलाके में भारी सैलाब आ गया। इस सैलाब की चपेट में आकर एक निर्माणाधीन होटल का स्थल पूरी तरह से नष्ट हो गया।
इस होटल निर्माण में काम कर रहे कई मजदूर, जो टेंट लगाकर वहीं रह रहे थे, तेज बहाव में बह गए। बड़कोट थानाध्यक्ष दीपक कठेत ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगभग 8 से 9 मजदूर लापता हो गए थे।
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तत्काल राहत और बचाव कार्य
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और लापता मजदूरों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। इस दौरान, 19 मजदूरों में से 10 को सुरक्षित पालीगाड़ ले जाया गया और उन्हें उनके घर भेज दिया गया।
सीएम धामी ने दिए निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों से घटना की पूरी जानकारी ली और राहत-बचाव कार्य को तेजी से चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने हर संभव सहायता सुनिश्चित करने के लिए कहा।
2 मजदूरों के शव बरामद, 7 की तलाश जारी
खोजबीन के दौरान, एसडीआरएफ और पुलिस टीमों को 18 किलोमीटर दूर यमुना नदी के तट, तिलाड़ी शहीद स्मारक के पास से 2 मजदूरों के शव मिले हैं। पुलिस ने दोनों शवों को नौगांव सीएचसी भेज दिया है। अभी भी 7 मजदूरों की तलाश जारी है, जिनमें 5 नेपाली मूल के, 3 देहरादून के और 1 उत्तर प्रदेश का है। लापता मजदूरों में से कुछ मलबे में दबे हो सकते हैं या नदी में बह गए हैं, ऐसा अनुमान है।
आपदा प्रबंधन विभाग की सक्रियता
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि आस-पास के पुलिस और सेना के जवान भी बचाव कार्य में लगे हैं। घटनास्थल तक मशीनें नहीं पहुंच पा रही हैं, इसलिए टीमें ही मैनुअल तरीके से खोजबीन कर रही हैं। यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड में मानसून के दौरान होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को उजागर करती है।
