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उत्तराखण्ड

प्रदेश में नए सर्किल रेट लागू, जमीन और मकान खरीदना हुआ महंगा

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देहरादून। प्रदेश में जमीन और भवनों की खरीद-फरोख्त अब और महंगी हो गई है। सरकार ने दो साल बाद सर्किल रेट में 9 से 22 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी रविवार से प्रभावी हो गई है। जमीन और बहुमंजिला आवासीय भवनों में फ्लैट तथा व्यावसायिक भवनों में दुकान खरीदने पर अब खरीदारों को अधिक राशि खर्च करनी होगी।
सरकार ने तेजी से हो रहे निर्माण और जमीन की बढ़ती खरीद-फरोख्त को देखते हुए यह निर्णय लिया है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने पुष्टि की है कि सभी जिलाधिकारियों को नए सर्किल रेट लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इससे सरकार को रजिस्ट्री से अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वर्ष 2023 में प्रदेश में सर्किल रेट बढ़ाए गए थे।
जानकारी के अनुसार, जिन क्षेत्रों में बड़ी परियोजनाओं, बहुमंजिला आवासीय भवनों और व्यावसायिक परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, वहां सर्किल रेट में अधिक बढ़ोतरी की गई है। शासन स्तर पर लंबे समय से नए सर्किल रेट लागू करने पर विचार चल रहा था। जिलों की ओर से भेजे गए प्रारंभिक प्रस्तावों में कुछ त्रुटियां पाई गई थीं, जिसके चलते शासन ने जिलों से नए प्रस्ताव दोबारा मंगवाए थे।
देहरादून जिला प्रशासन ने रविवार को नए सर्किल रेट जारी कर पांच अक्तूबर से इन्हें लागू कर दिया है। इसके साथ ही अन्य जिलों में भी बढ़े हुए सर्किल रेट लागू कर दिए गए हैं। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि नए रेट से सरकार का राजस्व तो बढ़ेगा, लेकिन इससे आम लोगों को घर या दुकान खरीदने में अधिक खर्च करना पड़ेगा।
बढ़े हुए सर्किल रेट से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों पर असर पड़ेगा। ग्रामीण इलाकों में जमीन की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी होगी, जबकि शहरी क्षेत्रों खासकर शहरों के आसपास विकसित हो रही कॉलोनियों और अपार्टमेंट परियोजनाओं में इसका सीधा असर खरीदारों की जेब पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेट बढ़ने से रजिस्ट्री से जुड़ी गड़बड़ियों और अवैध लेन-देन पर भी कुछ हद तक अंकुश लगेगा। हालांकि रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा समय में महंगाई और निर्माण लागत बढ़ने से खरीदार पहले ही दबाव में हैं, ऐसे में यह बढ़ोतरी उन्हें और प्रभावित कर सकती है।

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