अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
जागेश्वर मंदिर प्रबंधन में बड़ी चूक: हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर PIL दाखिल, CAG ऑडिट पर सवाल
जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति में पारदर्शिता के अभाव और रिक्त पदों को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका। 10 साल से नहीं हुआ CAG ऑडिट, 15 माह से प्रबंधक का पद खाली।
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के प्रसिद्ध जागेश्वर मंदिर की प्रबंधन समिति में व्याप्त अव्यवस्थाओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। साल 2013 में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद गठित इस समिति पर अब अदालत के ही आदेशों की अवहेलना करने के गंभीर आरोप लगे हैं। याचिका में कहा गया है कि मंदिर के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए जो नियम बनाए गए थे, उन्हें ताक पर रख दिया गया है। इस मामले में जल्द ही सुनवाई होने की संभावना है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। समिति में प्रबंधक का पद पिछले 15 महीनों से खाली है, जबकि उपाध्यक्ष का पद चार महीने से रिक्त पड़ा है। इसके अलावा, पुजारियों के प्रतिनिधि का कार्यकाल भी 5 दिसंबर को समाप्त हो चुका है। वर्तमान में यह महत्वपूर्ण संस्था पूरी तरह से सरकारी मोड (प्रशासक के अधीन) पर संचालित हो रही है। इस कारण मंदिर में केवल वेतन और बिल भुगतान जैसे सीमित कार्य ही हो रहे हैं, जबकि विकास के नए कार्य ठप पड़े हैं।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा मंदिर के ऑडिट को लेकर हुआ है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि समिति का ऑडिट हर साल नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से कराया जाए। हालांकि, पिछले 10 वर्षों में एक बार भी CAG ऑडिट नहीं हुआ। इसके बजाय, प्रबंधक अपनी पसंद के निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से ऑडिट करवाते रहे। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पांच सदस्यीय समिति की अनिवार्य सहमति के बिना ही केवल दो सदस्यों के हस्ताक्षर से कई विवादित प्रस्ताव पास किए गए हैं।
इसके अलावा, मंदिर समिति को अभी तक सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में नहीं लाया गया है, जबकि बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव पहले ही पास हो चुका था। जिला प्रशासन भी इस संस्था से जुड़ी जानकारियां साझा करने में आनाकानी कर रहा है। याचिका में मांग की गई है कि हाईकोर्ट के 2013 के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए और मंदिर प्रबंधन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल किया जाए। इस कानूनी कार्रवाई के बाद अब मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
