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अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

अल्मोड़ा: पर्वतीय कृषि रक्षा समिति ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी

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अल्मोड़ा में पर्वतीय कृषि रक्षा समिति ने जंगली जानवरों के आतंक, शिक्षा नीति और शराब की दुकानों के खिलाफ जिलाधिकारी अंशुल सिंह को ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई की मांग की।

अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय में आज पर्वतीय कृषि रक्षा समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अंशुल सिंह से मुलाकात की। समिति के सदस्यों ने जिलाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूर्व में दिए गए पत्रों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस दौरान सदस्यों ने पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से कृषि और जान-माल को हो रहे खतरे पर गहरी चिंता व्यक्त की। समिति ने मांग की कि जिला और राज्य योजना में सुरक्षा हेतु बजट को प्राथमिकता दी जाए।
समिति के पदाधिकारियों ने जंगलों में लगने वाली भीषण आग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने लीसा गड़ान की वर्तमान ‘खुरचन पद्धति’ को बदलकर ‘छिद्र पद्धति’ अपनाने की सलाह दी। सदस्यों का तर्क है कि पुरानी पद्धति से लीसा जमीन पर फैलता है, जिससे जंगल की आग अधिक भयावह हो जाती है और जैव विविधता नष्ट होती है। इसके साथ ही समिति ने सांसद और विधायक निधि का उपयोग कृषि सुरक्षा के लिए करने का सुझाव दिया।
शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर बात करते हुए समिति ने क्लस्टर विद्यालयों की नीति का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करना पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इसके अतिरिक्त, सरकार की शराब की दुकानें और उप-दुकानें खोलने की नीति को जनविरोधी बताते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की गई। समिति ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
क्षेत्रीय समस्याओं में मनिआगर-नगरखान सड़क की मरम्मत और लिंक मार्ग निर्माण की मांग भी शामिल रही। पिछले एक साल से दिए जा रहे ज्ञापनों पर संतोषजनक कार्रवाई न होने से सदस्य आक्रोशित नजर आए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने केवल सतही कार्रवाई की, तो वे भविष्य में उग्र आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। इस शिष्टमंडल में ब्रह्मा नंद डालाकोटी, के डी मिश्रा और शिवदत्त पांडे प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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