अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
पलायन का दंश : सोमेश्वर के वीरान गांव में 7 दिन तक पड़ा रहा दिव्यांग का शव
अल्मोड़ा के सोमेश्वर में दिव्यांग कुंदन राम की संदिग्ध मौत। पलायन से वीरान गांव में 7 दिन तक पड़ा रहा शव। सिर पर पत्थर के निशान और पड़ोसी फरार, पुलिस जांच जारी।
सोमेश्वर (अल्मोड़ा): सोमेश्वर बाजार से महज तीन किलोमीटर दूर स्थित रस्यारा गांव में शनिवार शाम एक दिव्यांग ग्रामीण का लहूलुहान शव मिलने से हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान 45 वर्षीय कुंदन राम के रूप में हुई है। पुलिस के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, शव करीब छह-सात दिन पुराना है। कुंदन के सिर पर पत्थर से वार किए जाने के गहरे निशान मिले हैं, जिससे पुलिस इसे सीधे तौर पर हत्या का मामला मान रही है।
घटना के पीछे की सबसे दुखद बात पलायन की मार है। जिस स्थान पर शव मिला, वहां के 35 घरों में से केवल 12 परिवारों की ही रिहाइश बची है। गांव में अधिकांश घरों पर ताले लटके होने के कारण, एक सप्ताह तक शव खेत में पड़ा रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी। कुंदन राम के पास मोबाइल नहीं था और उनकी पत्नी बच्चों के साथ मायके गई हुई थी, जिस कारण उनके लापता होने की सूचना समय पर नहीं मिल सकी।
पुलिस जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी दीपक पांडे नामक युवक के रूप में सामने आई है। कुंदन का शव दीपक के ही घर के पास वाले खेत में मिला है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिन पहले कुंदन और 34 वर्षीय दीपक के बीच किसी बात पर विवाद हुआ था। घटना के बाद से ही दीपक गांव से गायब है, जिससे उस पर हत्या का शक गहरा गया है। पुलिस आशंका जता रही है कि हत्या के बाद आरोपी फरार हो गया है।
सीओ गोपाल दत्त जोशी और कोतवाल मदन मोहन जोशी ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने बताया कि कुंदन राम पहले ऊर्जा निगम में मजदूरी करते थे, लेकिन तीन साल पहले करंट लगने से वह एक हाथ और पैर से दिव्यांग हो गए थे। इसके बाद वह बकरियां चराकर अपना गुजर-बसर कर रहे थे। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर आरोपी की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी हैं।
यह घटना दर्शाती है कि कैसे उत्तराखंड के खाली होते गांवों में अपराध की आशंकाएं बढ़ती जा रही हैं। वीरान घरों और बुजुर्गों की आबादी वाले इन गांवों में सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। पुलिस अब फरार पड़ोसी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
