अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
पिथौरागढ़: खेलते-खेलते तालाब में गिरी 3 साल की मासूम, अस्पताल पहुंचने से पहले थमी सांसें
पिथौरागढ़ के पाली गांव में दर्दनाक घटना। दादी के साथ खेत गई 3 साल की मासूम हिताक्षी की तालाब में डूबने से जान गई। परिजनों में मचा कोहराम। पढ़ें पूरी खबर।
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। विण ब्लॉक के पाली गांव में शनिवार सुबह एक तीन साल की बालिका की तालाब में डूबने से मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मिली जानकारी के अनुसार, पाली गांव निवासी कुलदीप चंद की तीन वर्षीय पुत्री हिताक्षी शनिवार सुबह अपनी दादी के साथ खेतों में गई थी। जब उसकी दादी पशुओं के लिए चारा काट रही थी, तब हिताक्षी पास ही खेल रही थी। चारा काटने के बाद जब दादी ने उसे आवाज दी, तो वह कहीं नजर नहीं आई। बालिका के अचानक ओझल होने से दादी बुरी तरह घबरा गई।
दादी ने तुरंत आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी और बच्ची की तलाश शुरू की गई। काफी खोजबीन के बाद मासूम हिताक्षी गांव के ही एक तालाब में बेसुध पड़ी मिली। ग्रामीण और परिजन आनन-फानन में उसे लेकर 18 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल पिथौरागढ़ पहुंचे। यहाँ चिकित्सकों ने गहन जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. प्रशांत अधिकारी ने बताया कि तालाब में डूबने के कारण बच्ची के फेफड़ों में पानी भर गया था। पानी भरने की वजह से मासूम को सांस लेने में दिक्कत हुई, जो अंततः उसकी मृत्यु का कारण बनी। मासूम की मौत की खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई।
इस घटना ने मासूम की मां और दादी को गहरा सदमा दिया है। गांव के लोगों ने प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्रों में असुरक्षित तालाबों की घेराबंदी करने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। हिताक्षी की असमय मौत ने पहाड़ी अंचलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
