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नई दिल्ली

कच्चे तेल की कीमतों में 15% की भारी गिरावट: $100 के नीचे आया ब्रेंट क्रूड, जानें क्या है वजह?

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कच्चे तेल की कीमतों में कोहराम! अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले के बाद ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर पर लुढ़का। जानें भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका क्या होगा असर।

वैश्विक ऊर्जा बाजार से राहत की बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 15% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस कूटनीतिक कदम ने बाजार में अनिश्चितता को कम कर दिया है, जिससे तेल की कीमतों में तेज बिकवाली का दौर शुरू हो गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड अब 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरकर 96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
आंकड़ों की बात करें तो ब्रेंट क्रूड वायदा में लगभग 17 डॉलर की कमी आई है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 13.5 प्रतिशत टूटकर 85.28 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य तनाव कम होने से आपूर्ति बाधित होने का खतरा टल गया है। इससे पहले, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं।
मध्य पूर्व में तनाव कम होने का सीधा लाभ भारत जैसे तेल आयातक देशों को मिलेगा। ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला न होने का अर्थ है कि खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य होती है, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और स्थिरता आ सकती है। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल, बाजार की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच अगली कूटनीतिक हलचलों पर टिकी हुई हैं। भू-राजनीतिक मोर्चे पर यह डी-एस्केलेशन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, कच्चे तेल के बाजार में उतार-चढ़ाव अभी भी जारी रह सकता है, इसलिए निवेशक और विश्लेषक सावधानी बरत रहे हैं। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

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