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नई दिल्ली

बिहार के नए मुख्यमंत्री होंगे सम्राट चौधरी, राज्यपाल से मिलकर पेश करेंगे दावा

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बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल! सम्राट चौधरी होंगे बिहार के अगले मुख्यमंत्री। जानें राबड़ी सरकार से सीएम की कुर्सी तक उनके सफर और विवादों की पूरी कहानी।

पटना: बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल के नेता **सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary)** बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे। सूत्रों के अनुसार, वह आज शाम तक बिहार के राज्यपाल सैयद अता हुसैन से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। वर्तमान में उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे सम्राट चौधरी अब राज्य की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठने के लिए तैयार हैं।
सम्राट चौधरी बिहार बीजेपी के सबसे प्रमुख ओबीसी चेहरों में से एक हैं और **कोईरी (Koeri)** समाज से आते हैं। उनका राजनीतिक सफर तीन दशक से भी अधिक लंबा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राबड़ी देवी सरकार में मंत्री के रूप में की थी और बाद में राजद छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए। 2025 में उन्हें बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जहाँ उन्होंने संगठन को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।
राजनीति सम्राट चौधरी को विरासत में मिली है। उनके पिता **शकुनी चौधरी** सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी भी विधायक रही हैं। 16 नवंबर 1968 को मुंगेर में जन्मे सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। वे नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी की सरकारों में भी अहम विभागों के मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
सम्राट चौधरी अपने बेबाक बयानों और प्रतिज्ञाओं के लिए भी चर्चा में रहे हैं। नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने पर उन्होंने **पगड़ी** बांधी थी और कसम खाई थी कि बीजेपी की सत्ता में वापसी के बाद ही इसे उतारेंगे। हालांकि, नीतीश की वापसी के बाद जब वे डिप्टी सीएम बने, तो अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के बाद उन्होंने वह पगड़ी खोल दी थी। उनके नाम के साथ कुछ विवाद भी जुड़े रहे, जैसे 1999 का आयु विवाद और राहुल गांधी की तुलना ओसामा बिन लादेन से करना।
निष्कर्षतः, सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में बीजेपी की नई सोशल इंजीनियरिंग का हिस्सा माना जा रहा है। एक अनुभवी विधायक, कुशल संगठनकर्ता और मुखर नेता के रूप में उनकी नई पारी पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के रूप में वे बिहार के विकास और आगामी चुनौतियों का सामना किस प्रकार करते हैं।

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