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नैनीताल

हाईटेक होगा नैनीताल का सुरक्षा घेरा: AI कैमरों से ट्रैफिक और अपराध पर लगेगी लगाम

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कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने नैनीताल, भीमताल और भवाली में AI आधारित कैमरे लगाने के निर्देश दिए। ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा के लिए 33 लाख का बजट मंजूर।

नैनीताल। पर्यटन नगरी नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व यातायात प्रबंधन को स्मार्ट बनाने की दिशा में प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नैनीताल, भीमताल और भवाली में AI (Artificial Intelligence) और ANPR (Automatic Number Plate Recognition)** कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। इस हाईटेक निगरानी प्रणाली से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या सुलझेगी, बल्कि अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
विकास प्राधिकरण द्वारा इस परियोजना के लिए लगभग 33 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इन कैमरों की मदद से प्रमुख मार्गों और पर्यटन स्थलों पर वाहनों की आवाजाही का सटीक डेटा वैज्ञानिक तरीके से जुटाया जाएगा। कमिश्नर दीपक रावत ने बताया कि यह पूरा डेटा एक केंद्रीय डेटा सेंटर में सुरक्षित रहेगा, जिसे अधिकारी अपने मोबाइल के जरिए भी मॉनिटर कर सकेंगे। इससे पार्किंग और टोल टैक्स वसूली में पारदर्शिता आएगी।
विशेष रूप से, प्रसिद्ध धार्मिक स्थल **कैंचीधाम** में आगामी 15 जून 2026 को आयोजित होने वाले मेले को लेकर प्रशासन बेहद गंभीर है। आयुक्त ने पुलिस विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि मेले से पहले कैंचीधाम गेट के पास अनिवार्य रूप से कैमरे स्थापित किए जाएं। इससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का सही आकलन किया जा सकेगा और भीड़ प्रबंधन में सुगमता होगी। शुक्रवार को आयोजित बैठक में इसके लिए बजट को तत्काल मंजूरी दे दी गई।
हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में हुई बैठक के दौरान पिछले 24 घंटों के ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण भी किया गया। आंकड़ों के अनुसार, हल्द्वानी से नैनीताल के बीच 3958 वाहनों की आवाजाही हुई, जबकि भवाली और नैनीताल के बीच भी भारी ट्रैफिक दर्ज किया गया। इन कैमरों के लगने के बाद पुलिस को रीयल-टाइम ट्रैफिक अपडेट्स मिलते रहेंगे, जिससे पर्यटन सीजन के दौरान लगने वाले लंबे जाम से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को निजात मिल सकेगी।
निष्कर्षतः, आधुनिक तकनीक का यह समावेश उत्तराखंड के पर्यटन को एक नई ऊंचाई और सुरक्षा प्रदान करेगा। कमिश्नर दीपक रावत की इस पहल से प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक वैज्ञानिक और जवाबदेह बनेगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो कुमाऊं के अन्य पर्यटन स्थलों पर भी इसी तरह की डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की जा सकती है।

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