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उत्तराखंड में इनर लाइन परमिट पर सख्ती, नेपाली श्रमिकों का विदेशी पंजीकरण अनिवार्य

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उत्तराखंड सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इनर लाइन परमिट क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई। अब नेपाली श्रमिकों व पोर्टर्स का विदेशी नागरिक के रूप में पंजीकरण जरूरी।

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे संवेदनशील इनर लाइन परमिट (आईएलपी) वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। शासन के नए आदेश के अनुसार, अब इन प्रतिबंधित सीमांत इलाकों में काम करने वाले नेपाली श्रमिकों और पोर्टर्स का विदेशी नागरिक के रूप में अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। हालांकि, यह कानूनी व्यवस्था पहले से ही लागू थी, लेकिन अब तक धरातल पर इसका सख्ती से पालन नहीं हो पा रहा था। फॉरेन रजिस्ट्रेशन रीजनल ऑफिस (एफआरआरओ) के कड़े दिशा-निर्देशों के बाद अब प्रशासन इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने में जुट गया है।
अब तक राज्य के सीमांत और ट्रैकिंग क्षेत्रों में इस नियम को लेकर केवल औपचारिकताएं ही निभाई जा रही थीं। ट्रैकिंग कारोबार से जुड़ी कंपनियां और एजेंसियां नेपाली मजदूरों व अपने कर्मचारियों का सामान्य विवरण ही दर्ज करती थीं। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद, अब इन श्रमिकों के पूरे प्रामाणिक दस्तावेज, पहचान पत्र और रिहायश से जुड़ी विस्तृत जानकारी के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के इस सख्त कदम से कई स्थानीय ट्रैकिंग एजेंसियां चिंतित हैं और वे इस प्रक्रिया पर आपत्ति जता रही हैं।
गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग संगठन का मानना है कि इस अचानक बढ़ी सख्ती के कारण पीक सीजन की ट्रैकिंग और पर्वतारोहण गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, एडवेंचर स्पोर्ट्स विशेषज्ञ और राफ्टिंग गाइड स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य मंजुल रावत ने वर्किंग वीजा को लेकर चिंता जताई है। उनके अनुसार, भारत में नेपाली नागरिकों के लिए वर्किंग वीजा का कोई अलग से कानूनी प्रावधान नहीं है। ऐसे में पंजीकरण की नई डिजिटल प्रक्रिया में बदलाव होने से ट्रैकिंग एजेंसियों के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों के स्थानीय कारोबारियों के सामने व्यावहारिक दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
दूसरी तरफ, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मंगलवार को इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा और व्यवस्थित संचालन के लिए ही इस पुरानी व्यवस्था को अब पूरी कड़ाई के साथ लागू किया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय कारोबारियों को भरोसा दिलाया कि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नियमों के दायरे में जरूरी व्यावहारिक रियायतें भी दी जाएंगी, ताकि पर्यटन सीजन प्रभावित न हो।

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