उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में वनाग्नि रोकने वालों को मिलेगा 1 लाख का इनाम, वन मंत्री का बड़ा एलान
उत्तराखंड सरकार जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए नई प्रोत्साहन योजना शुरू कर रही है। अच्छा काम करने वालों को 1 लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
देहरादून: उत्तराखंड के जंगलों में हर साल गर्मियों के मौसम में लगने वाली भीषण आग (वनाग्नि) पर काबू पाने के लिए वन विभाग ने एक अनोखी और बेहद प्रभावी पहल शुरू की है। प्रदेश में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं के बीच अब वन विभाग एक विशेष प्रोत्साहन योजना लागू करने जा रहा है। इस नई योजना के तहत, फायर सीजन खत्म होने के बाद हर जिले में वनाग्नि की रोकथाम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जांबाज वनकर्मियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय व्यक्तियों को नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
वन मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस बात की आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रोत्साहन योजना का अंतिम प्रस्ताव बहुत जल्द मंजूरी के लिए शासन को भेजा जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत पहला पुरस्कार पाने वाले को एक लाख रुपये की भारी-भरकम राशि दी जाएगी। इसके अलावा, बेहतर काम करने वाले दूसरे विजेता को 75 हजार रुपये और तीसरा स्थान हासिल करने वाले को 50 हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा।
वन मंत्री ने आगे बताया कि विभाग जंगलों की आग को बुझाने के लिए पूरी तरह से नई और व्यावहारिक रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत जंगलों के बीच से होकर गुजरने वाली सभी सरकारी पेयजल लाइनों पर विशेष हाइड्रेंट स्थापित किए जाएंगे। इन हाइड्रेंट्स की मदद से आग लगने की स्थिति में वनकर्मियों को मौके पर ही तुरंत पानी मिल सकेगा। इसके साथ ही, प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड 8555 टन चीड़ पिरूल संग्रह करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है, ताकि जंगलों से ज्वलनशील सामग्री को कम किया जा सके।
मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) वनाग्नि सुशांत पटनायक के अनुसार, इस साल जंगलों की सुरक्षा के लिए 5,625 जांबाज फायर वॉचर और छह हजार से अधिक नियमित वनकर्मियों को मैदान में उतारा गया है। इन सभी फ्रंटलाइन वर्कर की सुरक्षा के लिए सरकार ने 10 लाख रुपये का सामूहिक दुर्घटना बीमा भी कराया है। अधिकारियों ने बताया कि सैटेलाइट से मिलने वाले फायर अलर्ट में से केवल 14 प्रतिशत ही वास्तविक वनाग्नि के मामले होते हैं, बाकी खेतों या कूड़े की आग होती है। वन मंत्री ने जनता से अपील की है कि वे आग लगने पर वीडियो बनाने के बजाय उसे बुझाने में सहयोग करें।
