Connect with us

अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

उत्तराखंड के जंगलों में आग का तांडव: चीड़ बने बारूद

Published

on

खबर शेयर करें 👉

उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग पर एक स्थानीय नागरिक चन्दन नयाल की आंखों देखी रिपोर्ट। बढ़ते तापमान, अनियंत्रित पर्यटन और नए सूक्ष्म जीवों के खतरे पर बड़ी चिंता।

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में इन दिनों जंगलों की आग (फॉरेस्ट फायर) ने विकराल रूप धारण कर लिया है। धारी, ओड़ाखान, क्वारब से लेकर अल्मोड़ा, चमोली, पौड़ी और रुद्रप्रयाग तक के इलाके भीषण आग की लपटों में घिरे हैं। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता और चिंतित नागरिक चन्दन नयाल ने अपनी हालिया यात्रा के दौरान इस त्रासदी को बेहद करीब से महसूस किया। उन्होंने बताया कि जीवनदायिनी पिंडर नदी के दोनों छोरों पर स्थित बांज और चीड़ के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं, जिससे पूरी देवभूमि राख की ढेरी में तब्दील हो रही है।
जंगलों की इस भीषण आग और लगातार बढ़ते तापमान के कारण उत्तराखंड का पूरा इकोसिस्टम तबाह होने की कगार पर पहुंच गया है। चन्दन नयाल के अनुसार, इस बार पहाड़ों में एक बेहद अजीब और डराने वाली चीज़ देखने को मिल रही है। गाँव-गाँव और कस्बों में मच्छरों से भी छोटे, अत्यंत सूक्ष्म जीव (कीड़े) भारी मात्रा में मंडराते दिख रहे हैं। प्रकृति का यह बदलता संतुलन बेहद चिंताजनक है और वैज्ञानिकों के लिए एक गहरे शोध का विषय बन चुका है कि आखिर ये अनजाने जीव कहाँ से आ रहे हैं।
इस त्रासदी के बीच अनियंत्रित पर्यटन और ट्रैफिक जाम ने ‘कोढ़ में खाज’ का काम किया है। मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से बचने के लिए लाखों पर्यटक पहाड़ों का रुख कर रहे हैं, जिससे कर्णप्रयाग से लेकर श्रीनगर के बीच 5 से 6 घंटे का लंबा जाम लग रहा है। चारधाम यात्रा के नाम पर वाहनों के इस अत्यधिक बोझ, कचरे और धुएं से पहाड़ों का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। जलते हुए पेड़ और ऊपर से गिरते पत्थर अब राहगीरों के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।
आज सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन जंगलों में आग कौन लगा रहा है? क्या यह स्थानीय लोगों की लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई गहरा, सोचा-समझा षड्यंत्र चल रहा है? अगर सरकार, प्रशासन और आम नागरिक अब भी इस सोई हुई चेतना से नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ी को केवल राख के पहाड़ और सूखी नदियां ही मिलेंगी। यह आग केवल पेड़ों को नहीं, बल्कि उत्तराखंड के जल स्रोतों, शुद्ध हवा और इसके पूरे अस्तित्व को भस्म कर रही है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Select Language

Advertisement