उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में मानसून की भारी दस्तक, देहरादून समेत 5 जिलों में बेहद भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
उत्तराखंड में मानसून के आगमन के साथ ही देहरादून समेत कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। जिलाधिकारी ने चारधाम यात्रियों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
देहरादून। लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में धमाकेदार प्रवेश कर लिया है। मानसून की दस्तक के साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के अनुसार, 1 और 2 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर समेत कई जनपदों में भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने भी सभी जिलों को मुस्तैद रहने को कहा है।
इस गंभीर चेतावनी को देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी ने जनपदवासियों और पर्यटकों के लिए एक जरूरी एडवायजरी जारी की है। जिलाधिकारी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस दौरान अनावश्यक यात्रा करने से पूरी तरह बचें। उन्होंने पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से मौसम की अद्यतन जानकारी रखने और प्रशासन के नियमों का पालन करने का आग्रह किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, 2 जुलाई को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।
लगातार होने वाली इस बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और मलबे के कारण सड़कें बंद होने की आशंका बढ़ गई है। नदियों और पहाड़ी गदेरों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इसी खतरे को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने और फिलहाल सुरक्षित स्थानों पर रुकने की अपील की है। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
मौसम विभाग ने 3 और 4 जुलाई को भी कई पर्वतीय जिलों में तेज बौछारें पड़ने और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। आपदा की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन और राहत टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। कृषि विभाग ने किसानों को अपने खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और फसलों को सुरक्षित रखने की सलाह दी है। इसके अलावा, बांध, बैराज और जलविद्युत परियोजनाओं के अधिकारियों को भी पानी के स्तर पर चौबीसों घंटे कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
