उत्तराखण्ड
उत्तराखंड के जंगलों में हाहाकार: 37 जगहों पर भड़की आग, 150 से ज्यादा फायर अलर्ट जारी
उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग। गढ़वाल और कुमाऊं में 37 जगहों पर वनाग्नि भड़की। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने जारी किए 150 से अधिक फायर अलर्ट। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
हल्द्वानी। उत्तराखंड में गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग (वनाग्नि) की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। प्रदेशभर में गुरुवार को रिकॉर्ड 37 जगहों पर वनाग्नि भड़क उठी। इस भीषण आग के कारण राज्य का सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बिगड़ते हालातों को देखते हुए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने पूरे प्रदेश में 150 से ज्यादा फायर अलर्ट जारी किए हैं।
गुरुवार को सबसे ज्यादा तबाही गढ़वाल क्षेत्र में देखी गई, जहां 23 स्थानों पर आग लगी। इसके अलावा देहरादून और कुमाऊं मंडल में भी सात-सात स्थानों पर जंगल धधकते नजर आए। उत्तरकाशी की गंगा और यमुना घाटी समेत टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी जिलों में भी वनाग्नि का तांडव जारी रहा। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कई जगहों पर देर शाम तक आग पर काबू पा लिया गया।
इस भीषण आपदा से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दे रहा है। प्रभावित इलाकों में वनकर्मी, स्थानीय लोग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी हुई हैं। चकराता वन प्रभाग के देवघार रेंज में 50 से अधिक वनकर्मियों ने 12 घंटे की भारी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया। वन विभाग के प्रयासों से करीब 428 हेक्टेयर क्षेत्र को जलने से बचा लिया गया।
जंगलों की इस आग ने अब रिहायशी और कृषि क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। चकराता में तेज हवाओं के कारण फैली आग की चपेट में कई किसानों के सेब के बगीचे आ गए हैं। इस नुकसान से परेशान पीड़ित किसानों ने तहसील प्रशासन और उद्यान विभाग से तुरंत मुआवजे की मांग की है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने बढ़ती गर्मी और मानवीय लापरवाही को इस आग का मुख्य कारण बताया है।
