देहरादून
श्रीदेव सुमन विवि छात्र महासंघ चुनाव में एबीवीपी की धमाकेदार जीत, पांचों पदों पर किया कब्जा
ऋषिकेश। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय छात्र महासंघ के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने प्रतिद्वंदी संगठन एनएसयूआई का सूपड़ा साफ कर दिया। बुधवार को घोषित परिणामों में एबीवीपी ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष — सभी पांचों पदों पर जीत दर्ज की। एबीवीपी की इस ऐतिहासिक जीत के बाद कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जश्न का माहौल छा गया। जीत की घोषणा होते ही कैंपस आतिशबाजी और जयकारों से गूंज उठा।
बुधवार को श्रीदेव सुमन विवि के ऋषिकेश कैंपस कॉलेज में छात्र महासंघ चुनाव की प्रक्रिया सुबह आठ बजे से शुरू हुई। पहले चरण में नामांकन पत्रों की बिक्री की गई, इसके बाद 11 बजे नामांकन दाखिल हुए और दोपहर 12 बजे नामांकन पत्रों की जांच की गई। प्रत्याशियों की अंतिम सूची दोपहर दो बजे जारी की गई। मतदान प्रक्रिया दोपहर 2:30 से चार बजे तक चली, जिसमें विवि से संबद्ध 48 महाविद्यालयों के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने मतदान किया। शाम चार बजे से मतगणना शुरू हुई और शाम पांच बजे मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. वी.के. गुप्ता ने परिणाम घोषित किए।
घोषित नतीजों के अनुसार, अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के अमित काला (कोटद्वार डिग्री कॉलेज) ने 33 मत प्राप्त कर जीत हासिल की, जबकि एनएसयूआई के प्रत्याशी मोहित कुमार जेठवान (त्यूनी महाविद्यालय) को मात्र 12 वोट मिले।
उपाध्यक्ष पद पर मालदेवता रायपुर कॉलेज की एबीवीपी प्रत्याशी अनीता भंडारी ने 34 मत प्राप्त किए, जबकि एनएसयूआई के रितिक कुमार (लक्सर कॉलेज) को 11 वोटों पर संतोष करना पड़ा।
महासचिव पद पर नरेंद्र कॉलेज के एबीवीपी प्रत्याशी आदित्य भंडारी को 35 मत मिले। उनके मुकाबले में ऋषिकेश कैंपस से निर्दलीय रोहित को आठ और कर्णप्रयाग महाविद्यालय से निर्दलीय सुनील को चार मत प्राप्त हुए।
सचिव पद पर पुरोला महाविद्यालय से एबीवीपी के अभिषेक को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
कोषाध्यक्ष पद पर चिन्यालीसौंड़ कॉलेज के एबीवीपी प्रत्याशी आर्यन ने 35 मतों से जीत दर्ज की, जबकि एनएसयूआई की टीषा को केवल 11 मत मिले।
एबीवीपी की इस प्रचंड जीत के बाद कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर में नारेबाजी करते हुए एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और आतिशबाजी कर खुशी जाहिर की। संगठन के नेताओं ने कहा कि यह जीत विद्यार्थियों के विश्वास और राष्ट्रवादी विचारधारा की विजय है। उधर, एनएसयूआई को सभी पदों पर हार का सामना करना पड़ा, जिससे उसके समर्थकों में निराशा का माहौल देखा गया।
