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उत्तराखंड की आबादी में बंपर उछाल, 15 सालों में करीब 28 लाख बढ़े लोग

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उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण के आंकड़े सामने आ गए हैं। पिछले 15 वर्षों में राज्य की आबादी, परिवारों और मकानों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

देहरादून: उत्तराखंड से जनसांख्यिकी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में आगामी महाजनगणना के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और मकान गणना का काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस शुरुआती चरण से जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 15 वर्षों में उत्तराखंड की आबादी में करीब 28 लाख की भारी बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इस वृद्धि से राज्य में संसाधनों और विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा।
यदि हम वर्ष 2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो उस समय पूरे उत्तराखंड की कुल आबादी एक करोड़ 86 हजार दर्ज की गई थी। वहीं, इस बार के पहले चरण में ही जनगणना टीमों ने लगभग एक करोड़ 28 लाख की आबादी तक अपनी सीधी पहुंच बना ली है। आबादी के साथ-साथ राज्य में बुनियादी ढांचे का भी तेजी से विस्तार हुआ है। साल 2011 में प्रदेश में जहां 33 लाख 83 हजार से अधिक भवन पंजीकृत थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 45 लाख के पार पहुंच गई है।
भवनों के अलावा परिवारों की संख्या में भी राज्य के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2011 की मकान गणना के दौरान उत्तराखंड में कुल 19 लाख 97 हजार 68 परिवार निवास कर रहे थे। इस बार के नए सर्वे में परिवारों का यह आंकड़ा बढ़कर 28 लाख 30 हजार तक पहुंच गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि बीते डेढ़ दशक में प्रदेश के भीतर परिवारों की संख्या में लगभग आठ लाख का इजाफा हुआ है। हालांकि, विभाग इन आंकड़ों की अंतिम और आधिकारिक रिपोर्ट बाद में जारी करेगा।
उत्तराखंड के भौगोलिक परिवेश को देखते हुए विभाग ने एक विशेष रणनीति भी तैयार की है। इसके तहत आगामी सितंबर माह में राज्य के करीब 120 हिमाच्छादित यानी बर्फबारी वाले क्षेत्रों में पहले ही जनगणना करा ली जाएगी। दरअसल, मुख्य दौर की गणना के समय यानी फरवरी में भारी बर्फबारी के कारण इन ऊंचे इलाकों के लोग दूसरे स्थानों पर पलायन कर जाते हैं। इसके बाद, मैदानी और सामान्य पहाड़ी क्षेत्रों में 10 फरवरी से 28 फरवरी के बीच एक साथ अंतिम दौर की गणना की जाएगी, जो पूरी तरह से डिजिटल होगी।

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