अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
कौसानी के ‘डेविड भाई’ का निधन: पहाड़ों के सजग प्रहरी डेविड हॉकिन्स का सफर
कौसानी और लक्ष्मी आश्रम के स्तंभ डेविड हॉकिन्स (डेविड भाई) का 78 वर्ष की आयु में निधन। पर्यावरण प्रेमी और गांधीवादी विचारों के प्रति समर्पित एक युग का अंत।
कौसानी: उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कौसानी और लक्ष्मी आश्रम से जुड़े एक युग का अंत हो गया है। क्षेत्र के चहेते डेविड हॉकिन्स, जिन्हें स्थानीय लोग स्नेह से ‘डेविड भाई’ कहकर पुकारते थे, 78 वर्ष की आयु में इस संसार को अलविदा कह गए। उनके निधन की खबर से पूरे कौसानी और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
डेविड भाई ने न केवल कौसानी को अपना घर बनाया, बल्कि यहीं अपना परिवार भी बसाया। उनका विवाह लक्ष्मी आश्रम की हंसी साह से हुआ। उनकी बेटी दीपिका हॉकिन्स, जो आज विदेशों में रॉक क्लाइंबिंग इंस्ट्रक्टर के रूप में ख्याति प्राप्त कर चुकी हैं, उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी कौसानी की मिट्टी में ही हुई। डेविड भाई का जीवन पहाड़ों के प्रति अटूट प्रेम का उदाहरण था।
भूगोल के विद्यार्थी होने के कारण उन्हें प्रकृति और हिमालय के बदलते स्वरूप की गहरी समझ थी। वे वर्षों तक कौसानी क्षेत्र में वर्षा, बर्फबारी और तापमान का सटीक डेटा रिकॉर्ड करते रहे। उनका यह पर्यावरणीय डेटा भविष्य के शोधकर्ताओं के लिए एक बेशकीमती थाती है। पिंडारी ग्लेशियर के पिघलते स्वरूप को देखकर अक्सर उनके चेहरे पर पहाड़ों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता साफ झलकती थी।
लक्ष्मी आश्रम के लिए डेविड भाई एक मजबूत स्तंभ की तरह थे। उन्होंने आश्रम के कार्यालय और हिसाब-किताब की जिम्मेदारी अत्यंत ईमानदारी और अनुशासन के साथ निभाई। सरला बहन के पदचिन्हों पर चलते हुए, वे खादी के सामान को जीप में लादकर दन्या जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचाते थे। उनका जीवन गांधीवादी सादगी और सेवा का जीवंत उदाहरण था।
आज जब डेविड भाई हमारे बीच नहीं हैं, तो ऐसा महसूस होता है जैसे पहाड़ों ने अपना एक सच्चा मित्र और रक्षक खो दिया है। कौसानी की शांत हवाओं, लक्ष्मी आश्रम के आँगन और शाम की प्रार्थनाओं में उनकी सादगी और शांत मुस्कान की स्मृतियाँ हमेशा जीवित रहेंगी। उनका जाना उत्तराखंड के सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
