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नैनीताल में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक: डीएम ने दिए सख्त निर्देश, नहीं बढ़ेगी फीस

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नैनीताल डीएम ललित मोहन रयाल ने निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी और ड्रेस-किताबों के कमीशनखोरी पर सख्त रुख अपनाया है। आदेश उल्लंघन पर होगी कठोर कार्रवाई।

नैनीताल। नैनीताल जिले के निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने और महंगी ड्रेस-किताबों के लिए अभिभावकों पर दबाव डालने की शिकायतों पर प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने गुरुवार को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए स्कूलों की कमीशनखोरी पर लगाम लगा दी है। अब कोई भी स्कूल बिना ठोस कारण या एसएमसी (SMC) के परामर्श के फीस नहीं बढ़ा सकेगा।
अक्सर देखा जाता है कि नए सत्र की शुरुआत होते ही स्कूल प्रबंधन फीस में भारी वृद्धि कर देते हैं। डीएम ने साफ किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और अदालती आदेशों के तहत स्कूल ऐसा करने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि फीस बढ़ाने से पहले अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति की सहमति लेना अनिवार्य होगा।
जिलाधिकारी ने कमीशनखोरी के बड़े खेल को खत्म करने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। अब स्कूल किसी विशेष दुकान से ही किताबें, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव नहीं बना सकते। नैनीताल प्रशासन के पास लंबे समय से शिकायतें आ रही थीं कि कुछ स्कूल खास दुकानदारों से सांठगांठ कर महंगी सामग्री बिकवा रहे हैं। अब अभिभावक अपनी सुविधा अनुसार कहीं से भी सामान खरीदने को स्वतंत्र होंगे।
डीएम ने आदेश में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक सेवा है और इसे व्यावसायिक लाभ का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसकी मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है। इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई से अभिभावकों ने बड़ी राहत की सांस ली है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को पारदर्शिता बरतनी होगी और सभी खर्चों का विवरण सार्वजनिक करना होगा। इस निर्णय का उद्देश्य मध्यमवर्गीय परिवारों को निजी स्कूलों के आर्थिक शोषण से बचाना है। अब जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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