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नई दिल्ली

हल्द्वानी मामला: सुप्रीम कोर्ट में रेलवे ने रखा पुनर्वास का प्रस्ताव, मालिकाना हक पर CJI की सख्त टिप्पणी

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हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। रेलवे और उत्तराखंड सरकार ने पुनर्वास व मुआवजे पर अपना पक्ष रखा। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

नई दिल्ली: हल्द्वानी के बनभूलपुरा स्थित रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उत्तराखंड सरकार और रेलवे ने अपना संयुक्त हलफनामा पेश किया। इस दौरान कोर्ट ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और भूमि के मालिकाना हक जैसे गंभीर कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
रेलवे की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि कुल 13 मामले ऐसे हैं जहाँ भूमि ‘फ्रीहोल्ड’ श्रेणी में आती है। इन विशिष्ट मामलों के लिए मुआवजे का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा, जो लोग रेलवे की भूमि पर अवैध रूप से रह रहे थे, उन्हें राज्य सरकार द्वारा वैकल्पिक आवासीय व्यवस्था यानी पीएम आवास योजना के तहत घर देने की बात कही गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या 50 हजार से अधिक है। भूषण ने तर्क दिया कि इनमें से बहुत कम लोग ही प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। उन्होंने मांग की कि जो परिवार इस योजना के दायरे में नहीं आते, उनके पुनर्वास के लिए भी स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक भूमि पर इस तरह दावा नहीं किया जा सकता जैसे वह निजी संपत्ति हो। कोर्ट ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि सरकार के पास आवास देने का सटीक प्रस्ताव क्या है। जवाब में भाटी ने बताया कि ईडब्ल्यूएस (EWS) और अन्य श्रेणियों के तहत पात्र लोगों को घर मुहैया कराए जाएंगे, क्योंकि रेलवे को विस्तार के लिए अपनी जमीन की तत्काल आवश्यकता है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए दिन सुरक्षित रखा है। फिलहाल, कोर्ट इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि मानवीय आधार पर पुनर्वास और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। हल्द्वानी के इस संवेदनशील मुद्दे पर अब पूरे प्रदेश और देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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