Report by : CWN Desk
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मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है:- स्वामी निगमबोध तीर्थ

(गौरव कुमार)

  • निगम कुटीर वेद मंदिर द्वारा गरीब संतो को बांटे गए गर्म कंबल
  • अंधेरे से रोशनी की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है मकर संक्रांति पर्व

हरिद्वार। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भूपतवाला स्थित निगम कुटीर वेद मंदिर के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी निगमबोध तीर्थ महाराज द्वारा 251 गरीब संतो को कंबल वितरित किए गए।

इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि सूर्य उत्तरायण की स्थिति मकर संक्रांति से ही प्रारंभ होती है। इससे मानव प्रगति की ओर अग्रसर होता है और इस दिन स्नान, ध्यान, दान का विशेष महत्व होता है। हम सभी को अपने सामर्थ्य अनुसार गरीब असहाय लोगों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। श्रद्धा पूर्वक किए गए दान से सहस्त्र गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है और व्यक्ति का जीवन उन्नति की ओर अग्रसर होता है। और मकर संक्रांति का यह पर्व हमें अंधेरे से रोशनी की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। समाज में धर्म और आध्यात्मिकता का प्रचार प्रसार करने का यह धार्मिक समय है।

हम सभी को धर्म के मार्ग पर अग्रसर रहकर राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने में अपनी सहभागिता को सुनिश्चित करना चाहिए। गरीब निराश्रितो की सेवा और उन्हें दिया गया दान व्यक्ति को ईश्वरीय कृपा का पात्र बना देता है। भगवान शिव की नगरी में जो श्रद्धालु भक्त पतित पावनी मां गंगा का आचमन मात्र कर लेता है उसके जीवन के सभी पापों का शमन हो जाता है। और वह पुण्य को प्राप्त करता है। निगम कुटीर वेद मंदिर के प्रबंधक पंडित भीमसेन ने कहा कि संत महापुरुषों की कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाए उसका जीवन स्वयं ही सफल हो जाता है। महापुरुषों का तपोबल संपूर्ण विश्व में भारत को महान बनाता है इसलिए हम सभी को भोग विलास की भावना का त्याग कर भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के प्रति जागृत होना चाहिए और धर्म के संरक्षण संवर्धन के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना चाहिए। तभी भारत विश्वगुरु के रूप में संपूर्ण दुनिया का मार्गदर्शन करेगा। और भारत में राम राज्य की स्थापना होगी।

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