Report by : CWN Desk
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कीर्तिनगर: अलकनंदा नदी में डूबे पूजा के लिए आए महिला और व्यक्ति, SDRF जुटी तलाश में

कीर्तिनगर के ढुंडप्रयाग घाट पर पूजा के दौरान अलकनंदा नदी में डूबने से आशा देवी (40) और जसवंत सिंह (54) लापता। महिला को बचाने के प्रयास में व्यक्ति भी डूबा। SDRF और पुलिस का संयुक्त सर्च अभियान जारी।

कीर्तिनगर। उत्तराखंड कीर्तिनगर क्षेत्र में बहने वाली अलकनंदा नदी के ढुंडप्रयाग घाट पर मंगलवार को एक दुखद हादसा हो गया। पूजा के लिए आए लोगों में से एक महिला और एक व्यक्ति नदी में डूबने से लापता हो गए हैं। कोतवाली कीर्तिनगर के एसएसआई कुंवर राम आर्य ने घटना की पुष्टि की। यह समूह पौड़ी गढ़वाल जिले के पाबौ विकासखंड के जबरौली गांव से करीब 15 से अधिक लोगों के साथ पूजा-पाठ के लिए ढुंडप्रयाग घाट पर पहुंचा था।
⚠️ तेज बहाव में आशा देवी के डूबते ही बचाने कूदे जसवंत सिंह
पूजा समाप्त होने के बाद यह हादसा उस वक्त हुआ जब कुछ लोग अलकनंदा नदी में डुबकी लगा रहे थे। डुबकी लगाते समय आशा देवी (40) पत्नी गजपाल सिंह गुसाईं अचानक नदी के तेज बहाव में बहने लगीं और डूबने लगीं। यह देखते ही जसवंत सिंह (54) पुत्र कुंवर सिंह गुसाईं ने तुरंत महिला को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। हालांकि, इस साहसी प्रयास में वे भी नदी की तेज़ धारा की चपेट में आ गए और डूबकर लापता हो गए। घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई।
🔎 पुलिस और एसडीआरएफ का संयुक्त तलाशी अभियान जारी
एसएसआई कुंवर राम आर्य ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही तत्काल कीर्तिनगर पुलिस टीम और एसडीआरएफ श्रीनगर को मौके पर बुलाया गया। दोनों टीमों ने तुरंत संयुक्त रूप से नदी में डूबे महिला और व्यक्ति की तलाश शुरू कर दी। नदी का बहाव तेज होने के कारण तलाशी अभियान में दिक्कतें आ रही हैं। देर शाम तक चले तलाशी अभियान के बावजूद भी आशा देवी और जसवंत सिंह का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने परिजनों को ढांढस बंधाया है और खोजबीन जारी रखने की बात कही है।
🙏 पहाड़ी नदियों के किनारे सुरक्षा की ज़रूरत
यह घटना एक बार फिर पहाड़ी नदियों, खासकर अलकनंदा के किनारे सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर करती है। ढुंडप्रयाग घाट पर हुई इस त्रासदी ने लोगों को भावुक कर दिया है और स्थानीय निवासियों ने नदी घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा कर्मी तैनात करने की मांग की है। लोगों को नदी किनारे स्नान या डुबकी लगाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि पहाड़ी नदियों का बहाव और गहराई अप्रत्याशित होती है।

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