अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
अल्मोड़ा में गुलदार से सुरक्षा का नया कवच: अब महिलाएं पहनेंगी लोहे का ‘गुलबंद
अल्मोड़ा वन विभाग अब गुलदार के हमलों से महिलाओं को बचाने के लिए लोहे का कंटीला ‘गुलबंद’ इस्तेमाल करेगा। महाराष्ट्र की तर्ज पर शुरू हो रही यह नई सुरक्षा योजना।
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार और बाघ के बढ़ते हमलों ने ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी है। इस खतरे को कम करने के लिए अल्मोड़ा वन विभाग अब एक बेहद अनोखा प्रयोग करने जा रहा है। महाराष्ट्र की तर्ज पर यहाँ जंगल जाने वाली महिलाओं को लोहे का कंटीला ‘गुलबंद’ पहनाने की तैयारी की जा रही है। यह विशेष बेल्ट गर्दन पर होने वाले घातक हमलों को रोकने में मददगार साबित होगी।
यह ‘गुलबंद’ मुख्य रूप से चमड़े के पट्टे से बना होता है, जिसमें बाहर की तरफ लोहे की नुकीली कीलें लगी होती हैं। आमतौर पर पहाड़ों में लोग अपने पालतू कुत्तों को गुलदार से बचाने के लिए ऐसे पट्टे पहनाते हैं। अब इसी तकनीक का उपयोग इंसानी जान बचाने के लिए किया जाएगा। महाराष्ट्र के पिंपरखेड़ क्षेत्र में इस प्रयोग के जरिए कई महिलाओं की जान बचाई जा चुकी है।
गुलदार की शिकार करने की प्रवृत्ति होती है कि वह सीधे गले पर हमला कर दम घोटने की कोशिश करता है। ऐसे में यह लोहे का कवच हमले की तीव्रता को न केवल कम करेगा, बल्कि गुलदार को जख्मी कर पीछे हटने पर मजबूर कर देगा। वन विभाग फिलहाल उन ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं से बातचीत कर रहा है, जो घास और लकड़ी के लिए अक्सर घने जंगलों में जाती हैं।
उत्तराखंड वन विभाग वर्तमान में ‘लिविंग विद लेपर्ड’ थीम पर गंभीरता से काम कर रहा है। इससे पहले भी विभाग ने ग्रामीणों को सिर के पीछे मुखौटा पहनने की सलाह दी थी ताकि गुलदार भ्रमित हो सके। विभाग का मानना है कि इन छोटे लेकिन प्रभावी उपायों से वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व को सुरक्षित बनाया जा सकता है। सहमति मिलते ही इन गुलबंदों का वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
अल्मोड़ा के प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि यह प्रयोग सुरक्षा की दृष्टि से बेहद किफायती और कारगर है। जंगली इलाकों में अकेले जाने वाली महिलाओं के लिए यह एक जीवन रक्षक उपकरण साबित हो सकता है। वन विभाग इस योजना को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले इसके डिजाइन और आराम पर भी ध्यान दे रहा है ताकि ग्रामीणों को इसे पहनने में असुविधा न हो।
