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देहरादून

अब पुष्पगुच्छ नहीं, पुस्तक भेंट करें: देहरादून बुक फेस्टिवल में CM धामी की बड़ी अपील

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देहरादून के परेड मैदान में शुरू हुआ ‘दून पुस्तक महोत्सव 2026’। CM पुष्कर सिंह धामी ने किया शुभारंभ, कहा- पुस्तकें हैं दिमाग की खुराक। जानें महोत्सव की खास बातें।

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून के ऐतिहासिक परेड मैदान में ‘दून पुस्तक महोत्सव 2026’ का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज में पुस्तकों और पारंपरिक ज्ञान के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने प्रदेशवासियों से एक भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि भविष्य में किसी भी शुभ कार्य या समारोह में पुष्पगुच्छ (बुके) के स्थान पर पुस्तक या पौधा भेंट करने की परंपरा शुरू करें। धामी ने पुस्तकों को ‘दिमाग की खुराक’ बताते हुए छात्र-छात्राओं को विचारशील बनने के लिए निरंतर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक विरासत को याद करते हुए महान रचनाकारों को नमन किया। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश सरकार अब ‘साहित्यिक पर्यटन’ (Literary Tourism) को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्य कर रही है। इसके तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में ‘साहित्य ग्राम’ विकसित किए जा रहे हैं, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और कलम के जादूगरों से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भूमि ने विश्व विख्यात साहित्यकार दिए हैं, जिनकी रचनाएं आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रही हैं।
राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट (NBT) द्वारा आयोजित यह नौ दिवसीय महोत्सव 4 अप्रैल से 12 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस मेले में ज्ञान-विज्ञान और साहित्य के 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। खास बात यह है कि पाठकों को आकर्षित करने के लिए किताबों की खरीद पर 10% की विशेष छूट दी जा रही है। पुस्तक प्रेमियों के लिए सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक प्रवेश पूरी तरह निश्शुल्क रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग साहित्य के इस महाकुंभ का हिस्सा बन सकें।
महोत्सव केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजन के दौरान नरेंद्र सिंह नेगी जैसे दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुतियां और पांडव नृत्य के कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। इसके अलावा बच्चों के लिए विशेष गतिविधियां, लेखकों के साथ संवाद सत्र और एक फूड कोर्ट की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह आयोजन देहरादून के बौद्धिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान करेगा और युवाओं को डिजिटल स्क्रीन से हटाकर पन्नों की दुनिया में वापस लाएगा।

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