उत्तर प्रदेश
पीयूष गोयल ने हाथ से लिखीं 19 अद्भुत पुस्तकें रच दिया इतिहास
पीयूष गोयल ने मिरर इमेज और सुई-मेंहदी से 19 पुस्तकें लिखकर दुनिया को चौंकाया। श्रीमद्भगवद्गीता और मधुशाला जैसी कृतियों का अनोखा सफर यहाँ पढ़ें।
गाजियाबाद। दुनिया में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ लोग अपनी लगन से ऐसा इतिहास रच देते हैं जो मिसाल बन जाता है। ऐसे ही एक अद्भुत कलाकार हैं 59 वर्षीय पीयूष गोयल, जिन्होंने साहित्य की दुनिया में अपनी अनोखी कला से सबको हैरान कर दिया है। पीयूष गोयल ने अब तक 19 पुस्तकें अपने हाथों से लिखी हैं, जिनमें से 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने इन्हें सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि बेहद कठिन और अनोखी विधाओं में तैयार किया है।
पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर पीयूष गोयल के जीवन में वर्ष 2000 में हुए एक सड़क हादसे ने सब कुछ बदल दिया। नौ महीने के लंबे इलाज के दौरान उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता को अपने जीवन में उतारा और ठीक होने के बाद शब्दों को उल्टा (मिरर इमेज) लिखने का अनूठा अभ्यास शुरू किया। उन्होंने मिरर इमेज शैली में श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्याय और 700 श्लोक हिंदी व अंग्रेज़ी अनुवाद सहित लिख डाले। पीयूष गोयल की इन किताबों को पढ़ने के लिए दर्पण (शीशे) की जरूरत पड़ती है।
जब लोगों ने दर्पण की आवश्यकता पर सवाल उठाया, तो उन्होंने कला का एक और नया स्तर पेश किया। पीयूष गोयल ने हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध कृति ‘मधुशाला’ को सुई से मिरर इमेज में लिख डाला। यह सुई से लिखी दुनिया की पहली किताब मानी जाती है। इसके अलावा उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर की ‘गीतांजलि’ को मेंहदी कोन से, ‘पंचतंत्र’ को कार्बन पेपर से और एल्युमिनियम शीट पर कील से ‘पीयूष वाणी’ जैसी अद्भुत पुस्तकें लिखकर अपनी रचनात्मकता को साबित किया।
पीयूष गोयल की इस जादुई कला और धैर्य पर समाज और कला जगत से खूब सराहना और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। लोग उनकी इस कला को मानव इतिहास की अनूठी धरोहर मान रहे हैं। पीयूष गोयल केवल लेखक ही नहीं, बल्कि ऑटोग्राफ और पेन संग्रह के भी शौकीन हैं। वे प्रसिद्ध कवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों “नर हो, न निराश करो मन को, कुछ काम करो, कुछ काम करो” को अपने जीवन का असली आधार और प्रेरणा मानते हैं।
