हरिद्वार
राजाजी टाइगर रिजर्व में आज जंगल सफारी का आखिरी दिन, जानें कब खुलेंगे दोबारा गेट
Rajaji Tiger Reserve में मानसून के चलते सोमवार से जंगल सफारी बंद हो रही है। चीला और मोतीचूर रेंज के गेट 14 नवंबर तक बंद रहेंगे, जानिए पूरी खबर।
हरिद्वार। एशियाई हाथियों और शानदार जैव विविधता के लिए दुनिया भर में मशहूर उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी खबर है। पार्क की विभिन्न पर्यटक रेंजों में जंगल सफारी का लुत्फ उठाने के लिए सोमवार यानी आज साल का आखिरी दिन है। इसके बाद देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को राजाजी पार्क में सफारी के लिए करीब पांच महीने का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। मंगलवार से पार्क के सभी प्रमुख प्रवेश द्वार आगामी 14 नवंबर तक पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।
राजाजी पार्क प्रशासन के नियमों के अनुसार, हर साल मानसून सीजन के दौरान करीब पांच महीने के लिए सफारी की गतिविधियों को रोक दिया जाता है। पार्क निदेशक डॉ. कोको रोसे ने बताया कि 15 जून को शाम ठीक पांच बजे सैलानियों के लिए पार्क के गेट आधिकारिक रूप से बंद कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि राजाजी पार्क न केवल वन्यजीव संरक्षण बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन और अर्थव्यवस्था में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रशासन द्वारा मानसून में पार्क बंद करने के पीछे कई बड़े सुरक्षा और प्राकृतिक कारण हैं। दरअसल, बारिश के दिनों में जंगल के भीतर से बहने वाली बरसाती नदियों और नालों में अचानक भारी उफान आ जाता है। इसके अलावा जंगलों में तेजी से झाड़ियां पनप जाती हैं, जिससे सफारी के रास्तों पर दृश्यता बेहद कम हो जाती है। वन्यजीव विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मानसून की इस अवधि में मानवीय दखल बंद होने से प्रकृति को खुद को नवीनीकृत (रिचार्ज) करने का एक बेहतरीन अवसर मिलता है।
राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला और मोतीचूर रेंज पर्यटकों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं, जहां हाथी, गुलदार, हिरन, चीतल और कई दुर्लभ पक्षी आसानी से देखने को मिल जाते हैं। हालांकि, सैलानियों के लिए राहत की बात यह है कि राजाजी पार्क की गौहरी रेंज में स्थित विश्व प्रसिद्ध ‘चौरासी कुटी’ (बीटल्स आश्रम) पूरे साल पर्यटकों के लिए खुली रहेगी। इसके अलावा पार्क की सफारी व्यवस्था अब सीधे आगामी 15 नवंबर को एक नए स्वरूप और प्राकृतिक सुंदरता के साथ दोबारा शुरू की जाएगी।
