देहरादून
यूकेएसएसएससी पेपर लीक: खालिद के कक्ष में नहीं था जैमर, सुमन गवाह पर क्लीन चिट नहीं
देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक मामले में नई परतें खुलती जा रही हैं। मामले की जांच एसपी देहात (ऋषिकेश) जया बलोनी के पास है। मंगलवार को उन्होंने प्रेसवार्ता कर बताया कि आरोपी खालिद जिस परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे रहा था, वहां सुरक्षा इंतजामों में गंभीर चूक सामने आई है।
खालिद का परीक्षा केंद्र हरिद्वार जिले के बहादुरपुर जट स्थित आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज में था। इस केंद्र में कुल 18 कक्ष बनाए गए थे, जिनमें से 15 कक्षों में जैमर लगाए गए थे। लेकिन कक्ष संख्या 9, 17 और 18 में जैमर नहीं थे। खास बात यह है कि खालिद कक्ष संख्या 9 में परीक्षा दे रहा था। एसपी बलोनी ने बताया कि अब संबंधित तकनीकी कंपनी से जवाब मांगा गया है कि आखिर ये तीन कमरे बिना जैमर क्यों रह गए।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि खालिद पहले से ही तय करके परीक्षा केंद्र पहुंचा था कि प्रश्नपत्र बाहर भेजना है। उसने प्रोफेसर सुमन को पेपर हल करने और अपनी बहन को पेपर सुमन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंप रखी थी। रविवार को परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू हुई। कुछ देर बाद खालिद ने वॉशरूम जाने की अनुमति मांगी, जिसे कक्ष निरीक्षक ने आधे घंटे पूरे होने तक रोका। जैसे ही 30 मिनट हुए, खालिद वॉशरूम गया और कई मिनट बाद लौटा। संदेह है कि इसी दौरान उसने अपने पास मौजूद डिवाइस से प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की फोटो खींचकर अपनी बहन के फोन पर भेजी। बाद में यह पेपर सुमन तक पहुंचा, जहां से हल करके जवाब वापस आए।
अब सवाल यह है कि खालिद परीक्षा केंद्र के सख्त इंतजामों के बावजूद डिवाइस अंदर कैसे ले गया? क्या उसने पहले से ही केंद्र में डिवाइस छिपाकर रख दी थी? या फिर किसी और ने परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर डिवाइस तक पहुंचाई? यह पहलू अभी भी जांच का विषय बना हुआ है।
सुमन की भूमिका पर संशय
पेपर लीक प्रकरण में प्रो. सुमन को सबसे पहले आरोपी बनाया गया था। लेकिन कई दौर की पूछताछ के बाद भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया है। एसपी जया बलोनी ने बताया कि सुमन ने अपने बयान में कहा कि उसका पेपर लीक करने का इरादा नहीं था। उसने दावा किया कि पेपर सॉल्व करने के बाद वह इसकी जानकारी पुलिस को देना चाहती थी, मगर बॉबी पंवार ने उसे रोक दिया। पुलिस ने अभी तक सुमन को आरोपी से गवाह के कॉलम तक रखा है। हालांकि उसे क्लीन चिट नहीं मिली है और गिरफ्तारी की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
सुरक्षा पर सवाल
जांच में सामने आई खामियां आयोग की ओर से किए गए “त्रुटिरहित परीक्षा” के दावों की पोल खोल रही हैं। जब प्रवेश द्वार पर कड़ी चेकिंग और जैमर की व्यवस्था थी, तो खालिद डिवाइस अंदर कैसे ले गया? तीन कक्षों में जैमर क्यों नहीं लगाए गए? क्या इस चूक में कोई अंदरूनी हाथ भी शामिल था? इन तमाम सवालों ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। मामले में जांच जारी है और पुलिस तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ मानव संसाधन की भूमिका की भी गहन पड़ताल कर रही है।
