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उत्तर प्रदेश

जीपीएफ खातों में 5 करोड़ के घोटाले में मुरादाबाद में कार्यरत दो बीईओ का भी नाम सामने आया

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अलीगढ़/मुरादाबाद। अलीगढ़ में बेसिक शिक्षा विभाग में 2003 से 2013 के बीच सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खातों में हुए घोटाले के मामले में मंगलवार को बन्नादेवी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। इस मामले में मुरादाबाद में कार्यरत दो बीईओ का भी नाम सामने आया है। घोटाले में 520 शिक्षकों के डमी खाते खोलकर पांच करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई।

घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?

यह घोटाला 2020 में तब सामने आया जब टप्पल के शिक्षक जगदीश प्रसाद के खाते में 34 लाख रुपये 35 बार में भेजे गए। इस अनियमितता के उजागर होने के बाद जिला स्तर पर जांच शुरू हुई। जांच में अधिकारियों और पटल लिपिकों की संलिप्तता पाई गई।

जांच में सामने आई गड़बड़ियां

विशेष जांच और ऑडिट में कई अनियमितताएं उजागर हुईं—

• ऋण घटाने की आख्या प्रस्तुत नहीं की गई।

• लेजर पृष्ठ गायब पाए गए।

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• ऋण प्रविष्टियां दर्ज नहीं की गईं।

• रजिस्टर में चेक नंबर अंकित नहीं थे।

• निरस्त चेकों का कोई उल्लेख रजिस्टर में नहीं था।

• भुगतान की गई धनराशि और चेक की एंट्री गायब थी।

प्रथमदृष्टया कार्रवाई

घोटाले की प्रारंभिक जांच में दोषी पाए गए दो बाबुओं को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद 4 फरवरी 2025 को अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग, लखनऊ की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस मामले की समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद विशेष संपरीक्षा रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया गया।

कई अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज

मंगलवार को बीएसए डॉ. राकेश कुमार सिंह ने 11 बीएसए, 30 बीईओ और 10 वित्त अधिकारियों समेत कुल 61 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ बन्नादेवी थाने में मुकदमा दर्ज कराया। मुकदमे में शामिल मोहम्मद अजंहरे आलम वर्तमान में बिलारी ब्लॉक के बीईओ हैं, जबकि वंदना सैनी मुरादाबाद नगर में बीईओ के पद पर कार्यरत हैं।

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विशेष संपरीक्षा रिपोर्ट के निष्कर्ष

विशेष संपरीक्षा रिपोर्ट में पाया गया कि—

• शिक्षकों के फर्जी खाते खोलकर उनके नाम से धनराशि निकाली गई।

• कई चेक बिना प्रविष्टि के जारी किए गए।

• निरस्त चेक का रिकॉर्ड गायब पाया गया।

जांच और कार्रवाई का आदेश

विशेष संपरीक्षा की रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। इसके बाद मौजूदा बीएसए डॉ. राकेश कुमार सिंह ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के पदनाम से मुकदमा दर्ज कराया। इस घोटाले से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शासन ने दोषी पाए गए सभी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताएं दोबारा न हो सकें।

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