हल्द्वानी
पितृसत्ता और पूँजीवाद से मुक्ति की राह: पछास के दो दिवसीय शिविर में बड़ा ऐलान!
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के दो दिवसीय अध्ययन शिविर में ‘नारी प्रश्न, लैंगिक प्रश्न और मुक्ति की राह’ पर गहन चर्चा हुई। इसमें LGBTQIA+ अधिकारों और समाजवादी क्रांति के माध्यम से वास्तविक लैंगिक समानता की बात कही गई।
हल्द्वानी। परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) द्वारा आयोजित दो दिवसीय केन्द्रीय कार्यकर्ता शिविर ‘नारी प्रश्न, लैंगिक प्रश्न और मुक्ति की राह’ विषय पर गहन चर्चा के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। इस अध्ययन शिविर में देशभर के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता के मूल कारणों पर मंथन किया।
ऐतिहासिक गुलामी और खोखले नारे

शिविर के पहले दिन, ऐतिहासिक रूप से महिलाओं की गुलामी के कारणों पर गंभीर विमर्श हुआ, जिसमें पितृसत्ता और सामंती मूल्यों की गहरी भूमिका को उजागर किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि ये कारक सदियों से लैंगिक प्रश्न के केंद्र में रहे हैं। इसके साथ ही, आज के दौर में पूँजीवाद द्वारा दिए जा रहे नारी मुक्ति के खोखले नारों की कड़ी आलोचना की गई, जो केवल उपभोक्ता संस्कृति को बढ़ावा देते हैं लेकिन वास्तविक मुक्ति नहीं दे पाते।
मुक्ति की राह: मेहनतकश संघर्ष

चर्चा में नारी आंदोलन (नारीवाद) और मेहनतकश नारी आंदोलन की विभिन्न धाराओं पर विश्लेषण किया गया। यह निष्कर्ष निकाला गया कि केवल सतही सुधारों से बात नहीं बनेगी। शिविर में LGBTQIA+ समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर भी विस्तृत चर्चा हुई, और उनके संघर्षों को भी लैंगिक समानता की लड़ाई का अभिन्न अंग माना गया। यह स्पष्ट किया गया कि सभी लैंगिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न गैर-जनवादी पूंजीवादी व्यवस्था का ही परिणाम है।
समाधान समाजवादी क्रांति में

शिविर का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि लैंगिक आधार पर नारियों और LGBTQIA+ का उत्पीड़न सीधे तौर पर गैर-जनवादी पूँजीवाद से जुड़ा हुआ है। इसके वास्तविक समाधान का रास्ता समाजवादी क्रांति से ही प्रशस्त होगा। कार्यकर्ताओं ने आह्वान किया कि हमें इस शोषणकारी व्यवस्था के हर रूप के खिलाफ संघर्ष करना होगा। जब तक यह व्यवस्था बनी रहती है, तब तक हर लैंगिक समानता यानी बराबरी के संघर्ष के पक्ष में खड़ा होना और ऐसे संघर्षों को आगे बढ़ाना पछास की मुख्य जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष और आगामी ज़िम्मेदारी
इस अध्ययन शिविर ने कार्यकर्ताओं को लैंगिक उत्पीड़न के संरचनात्मक कारणों को समझने और उनके समाधान के लिए एक स्पष्ट, क्रांतिकारी दृष्टिकोण दिया है। यह शिविर सभी कार्यकर्ताओं को पूँजीवाद और पितृसत्ता के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करने के लिए प्रेरित करता है, ताकि समाज में वास्तविक नारी मुक्ति और सभी लैंगिकताओं को बराबरी का दर्जा मिल सके। यह समय केवल विचारों का नहीं, बल्कि संगठित कार्रवाई का है।
