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हल्द्वानी

जोहार महोत्सव 8 नवंबर से हल्द्वानी में, जड़ी-बूटियों और पारंपरिक कला का लगेगा मेला

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सीमांत क्षेत्र की समृद्ध जोहार संस्कृति और परंपराओं को सहेजने वाला तीन दिवसीय जोहार महोत्सव हल्द्वानी में 8 से 10 नवंबर तक आयोजित होगा। जानिए इस भव्य आयोजन में क्या-क्या खास होगा।

हल्द्वानी। सीमांत क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और अनूठी परंपराओं को सहेजने के उद्देश्य से इस वर्ष जोहार महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह तीन दिवसीय महोत्सव 8 नवंबर से 10 नवंबर तक एमबी इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित किया जाएगा। जोहार महोत्सव को भव्य और दिव्य रूप देने के लिए सीमांत क्षेत्र के लोग पूरी लगन और उत्साह के साथ तैयारियों में जुटे हुए हैं। यह आयोजन पूरे कुमाऊं क्षेत्र के संस्कृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है।

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मिलम घाटी की संस्कृति को समर्पित


महोत्सव के आयोजक और जोहार समिति के अध्यक्ष ने बताया कि यह विशेष आयोजन पिथौरागढ़ जिले की चीन सीमा से सटे मिलम घाटी की समृद्ध जोहार संस्कृति को समर्पित है। महोत्सव की औपचारिक शुरुआत 8 नवंबर को दोपहर 1 बजे एक रंगारंग पारंपरिक सांस्कृतिक जुलूस के साथ होगी, जिसमें स्थानीय वेशभूषा और लोक नृत्यों की झलक देखने को मिलेगी। यह जुलूस सीमांत क्षेत्र की गौरवशाली विरासत को प्रदर्शित करेगा।


जड़ी-बूटियाँ, हस्तशिल्प और लोक कलाएँ


तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में पर्वतीय सीमांत क्षेत्र की कई दुर्लभ और खास चीजें देखने को मिलेंगी। महोत्सव का मुख्य आकर्षण यहां प्रदर्शित होने वाली जड़ी-बूटियां, औषधियां और स्थानीय हस्तशिल्प होंगे। संस्कृति प्रेमी यहां की पारंपरिक कला और लोक संस्कृति का अनोखा संगम देख सकेंगे। यह आयोजन न केवल स्थानीय लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों को उत्तराखंड की सीमांत संस्कृति से परिचित कराएगा।

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कुमाऊं क्षेत्र के लिए आकर्षण का केंद्र


जोहार महोत्सव 2025 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने का एक मंच भी है। इस महोत्सव के सफल आयोजन से उम्मीद है कि सीमांत क्षेत्र की कला और हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी। हल्द्वानी में होने वाला यह उत्सव पूरे कुमाऊं क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक मिलन स्थल बनेगा।

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