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नई दिल्ली

हरिद्वार: आचार्य करुणेश मिश्र बोले- ‘आचरण में उपदेश’ बिना श्रोताओं को लाभ नहीं | भागवत महायज्ञ

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हरिद्वार के मोती महल मंडप में श्रीमद्भागवत भक्ति महायज्ञ के दौरान आचार्य करुणेश मिश्र ने कहा कि कथाव्यास का आचरण ही श्रोता को प्रकाशित करता है। उन्होंने बताया भगवान कैसे पूतना को भी माता यशोदा जैसी गति देते हैं। पढ़ें पूरी कथा का सार।

हरिद्वार। अध्यात्म चेतना संघ की ओर से ज्वालापुर स्थित मोती महल मंडप में भव्य श्रीमद्भागवत भक्ति महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस महायज्ञ के दूसरे दिन कथाव्यास आचार्य करुणेश मिश्र ने अपने प्रवचन से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कथा के दौरान व्यावहारिक जीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात कही, जिसने सभी का ध्यान खींचा।
आचार्य करुणेश मिश्र ने स्पष्ट किया कि व्यास पीठ से कथावाचक श्रोताओं को जो उपदेश देता है, यदि वे उपदेश उसके स्वयं के आचरण में न हों, तो श्रोताओं को कथा श्रवण का कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही आवश्यक है कि जो बातें व्यास पीठ से कही जा रही हैं, वे बातें कथाव्यास के निजी जीवन में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी बात तभी दूसरों को प्रकाशित करती है, जब वह वक्ता के खुद के आचरण में हो।
आचार्यजी ने भगवान वेद व्यास जी के चरित्र और श्री शुकदेव जी के प्राकट्य की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि वेद व्यास जी ने तभी शुकदेव जी को धर्म प्रचार की आज्ञा दी, जब उन्होंने माता शारदामणी से उनमें धर्म प्रचार के लिए आवश्यक गुण उनके चरित्र में देखे। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भगवान की दयालुता और सरलता का वर्णन किया।
उन्होंने भक्तों को बताया कि भगवान का स्वभाव इतना दयालु है कि वे सब पर कृपा करते हैं। भगवान तो उनको मारने के उद्देश्य से आने वाली राक्षसी पूतना को भी वही गति प्रदान करते हैं, जो उन्होंने माता यशोदा को दी। आचार्यजी ने कहा कि हम केवल विपत्ति के समय ही भगवान को याद करते हैं। जबकि, सबसे बड़ी विपत्ति तो वह है, जब हमारे पास अपार सम्पत्ति होते हुए भी नाम जप, नाम सुमिरन और कथा श्रवण के लिए समय न हो।
कथा के समापन पर श्री भगवान की पावन आरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से कमल कांत शर्मा, ब्रजेश कुमार शर्मा, रवीन्द्र सिंघल, सुधीर शर्मा, तथा मुख्य यजमान दम्पति सहित अनेक श्रद्धालुजन और यजमान परिवार उपस्थित रहे। श्रीमद्भागवत कथा का यह आयोजन हरिद्वार में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा है।

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