नई दिल्ली
शेयर बाजार में हाहाकार: 4 दिन में डूबे 7 लाख करोड़, सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम
भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन भारी गिरावट। सेंसेक्स 1,580 अंक टूटा, निवेशकों के 7.19 लाख करोड़ रुपये स्वाहा। जानें गिरावट के 5 बड़े कारण और आगे की रणनीति।
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार दिनों से जारी बिकवाली ने निवेशकों की कमर तोड़ दी है। गुरुवार को बाजार बंद होने तक बीएसई सेंसेक्स 780 अंक गिरकर 84,180 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 1.01% की गिरावट के साथ 25,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। इस चार दिवसीय गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में लगभग 7.19 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आई है।
ट्रंप की टैरिफ चेतावनी से बाजार में खौफ
बाजार में मची इस अफरा-तफरी का सबसे बड़ा कारण अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ चेतावनी है। ट्रंप ने रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका ऐसे बिल पर विचार कर रहा है जिससे भारतीय उत्पादों पर उच्च आयात शुल्क लगाया जा सकता है। इससे निर्यात आधारित कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा रही है।
दिग्गज शेयरों और सेक्टरों में भारी दबाव
बाजार की इस गिरावट में रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे हेवीवेट शेयरों का बड़ा हाथ रहा, जो इस सप्ताह 4% तक टूट चुके हैं। सेक्टर के लिहाज से देखें तो मेटल इंडेक्स में 1.9% और आईटी इंडेक्स में 1% की गिरावट दर्ज की गई। रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ट्रेंट (Trent) के शेयरों में भी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण दबाव देखा गया, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ा।
वैश्विक तनाव और वेनेजुएला संकट
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भू-राजनीतिक तनाव ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हिरासत की खबरों ने तेल बाजारों में हलचल मचा दी है। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा, जहां जापान का निक्केई और चीन का सीएसआई इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। इसका सीधा असर भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स पर पड़ा है।
आगे क्या करें निवेशक?
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार फिलहाल दिशाहीन स्थिति में है। तकनीकी रूप से जब तक निफ्टी प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार नहीं करता, तब तक बिकवाली का दबाव बना रह सकता है। निवेशकों को इस समय आक्रामक खरीदारी से बचकर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। घरेलू विकास दर (GDP) में सुस्ती की आहट ने भी बड़े फंड हाउसेज को मुनाफावसूली के लिए मजबूर किया है।
