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हल्द्वानी

व्लॉगर ज्योति अधिकारी जेल से रिहा होते ही अशोभनीय टिप्पणी मामले में मांगी माफी

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हल्द्वानी की प्रसिद्ध व्लॉगर ज्योति अधिकारी 6 दिन बाद जेल से रिहा हुईं। बाहर आते ही वीडियो जारी कर समर्थकों का शुक्रिया अदा किया और विवादित बयान पर माफी मांगी।

हल्द्वानी। उत्तराखंड की चर्चित व्लॉगर ज्योति अधिकारी (Jyoti Adhikari) को बुधवार शाम छह दिन जेल में बिताने के बाद रिहा कर दिया गया। जेल की दहलीज से बाहर निकलते ही ज्योति ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में उन्होंने कठिन समय में साथ देने वाले समर्थकों का आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने अपने विवादित बयानों से आहत हुए लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है।
ज्योति अधिकारी पर आरोप था कि उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान दरांती लहराई और कुमाऊं की महिलाओं व लोक देवताओं पर अशोभनीय टिप्पणी की थी। इस मामले में जूही चुफाल नामक युवती ने पुलिस में तहरीर दी थी। विवाद तब और बढ़ गया जब ज्योति ने थाने आते समय वादिनी को सोशल मीडिया के माध्यम से कथित तौर पर धमकाया था। इसके बाद मुखानी पुलिस ने उनके खिलाफ दूसरा मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
जेल अधीक्षक प्रमोद पांडेय ने बताया कि खटीमा कोर्ट (Khatima Court) के आदेशानुसार ज्योति की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कस्टडी वारंट न होने की स्थिति में उन्हें जेल में नहीं रोका जा सकता। अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि हल्द्वानी भेजा गया वारंट केवल एक प्रोडक्शन वारंट था, जिसके आधार पर जमानत मिलने के बाद किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
ज्योति अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उनके पक्ष और विपक्ष में लंबी बहस छिड़ गई थी। कुमाऊं की संस्कृति और भावनाओं से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की थी। हालांकि, अब रिहाई के बाद ज्योति ने कहा है कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
भले ही ज्योति अधिकारी जेल से बाहर आ गई हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्हें गुरुवार को फिर से खटीमा कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। पुलिस मामले की जांच जारी रखे हुए है। प्रशासन ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को चेतावनी दी है कि वे धार्मिक भावनाओं या क्षेत्रीय संस्कृति के खिलाफ टिप्पणी करने से बचें, अन्यथा सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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