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उत्तराखण्ड

पूर्व CM भगत सिंह कोश्यारी ने लिया देहदान का संकल्प, पेश की मानवता की मिसाल

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने अंगदान और देहदान का संकल्प लिया। दधीचि देहदान समिति के माध्यम से कराया पंजीकरण। युवाओं को दिया बड़ा संदेश।

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एक बार फिर अपने सामाजिक उत्तरदायित्व से जनता का दिल जीत लिया है। 83 वर्षीय वरिष्ठ नेता ने मानवता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए अपने जीवन के बाद नेत्रदान, अंगदान और पूर्ण देहदान करने का संकल्प लिया है। उनके इस निर्णय को चिकित्सा जगत और समाज सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।
गुरुवार को उन्होंने यह ऐतिहासिक संकल्प दधीचि देहदान समिति देहरादून के माध्यम से औपचारिक रूप से पंजीकृत कराया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डॉ. मुकेश गोयल ने बताया कि समिति लंबे समय से समाज में अंगदान और देहदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने और जन-जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। कोश्यारी जैसे कद्दावर व्यक्तित्व के जुड़ने से इस अभियान को नई गति मिलेगी।
कोश्यारी ने इस निर्णय के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका शरीर मृत्यु के पश्चात भी समाज के काम आ सके, यही उनकी इच्छा है। उन्होंने बताया कि देहदान से चिकित्सा अनुसंधान (Medical Research) में मदद मिलती है और भावी डॉक्टरों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है। साथ ही, अंगदान के माध्यम से कई जरूरतमंदों को नया जीवन दिया जा सकता है।
समाज में अंगदान को लेकर आज भी कई प्रकार की भ्रांतियां व्याप्त हैं। भगत सिंह कोश्यारी का यह कदम विशेष रूप से युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक सशक्त संदेश है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब सार्वजनिक जीवन के बड़े चेहरे ऐसे निर्णय लेते हैं, तो आम जनता के बीच झिझक कम होती है। यह निर्णय उत्तराखंड में स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
चिकित्सा विज्ञान में देहदान को ‘महादान’ की संज्ञा दी गई है। कोश्यारी के इस संकल्प की सराहना प्रदेश के मुख्यमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी की है। दधीचि देहदान समिति ने लोगों से अपील की है कि वे भी इस मुहिम का हिस्सा बनें। कोश्यारी के इस प्रेरक कदम के बाद कई अन्य प्रबुद्ध नागरिक भी देहदान की शपथ लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

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