उत्तराखंड पुलिस
उत्तराखंड STF की सर्जिकल स्ट्राइक: नकली दवा गिरोह के 3 और सदस्य गिरफ्तार
उत्तराखंड एसटीएफ ने ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाएं बनाने वाले गिरोह के 3 और सदस्यों को दबोचा। अब तक 16 गिरफ्तार। भारी मात्रा में नकली पैरासिटामोल बरामद।
देहरादून: उत्तराखंड में जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर मौत का सामान बेचने वालों के खिलाफ एसटीएफ (STF) का अभियान जारी है। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाइयां बनाने और बेचने वाले गिरोह के तीन और सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस बड़े नेटवर्क में अब तक कुल 16 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि यह गिरोह नामी कंपनियों के रैपर, क्यूआर कोड और पैकिंग का इस्तेमाल कर नकली दवाएं बाजार में खपा रहा था। ताजा कार्रवाई में एसटीएफ ने नरेश धीमान, लोकेश गुलाटी और मोहतरम अली को रुड़की और देवबंद (सहारनपुर) से दबोचा है। इन आरोपियों ने पूर्व में गिरफ्तार मास्टरमाइंड नवीन बंसल के साथ मिलकर इस संगठित अपराध को अंजाम दिया था।
जांच के दौरान एसटीएफ ने भारी मात्रा में कच्चा माल और तैयार दवाएं बरामद की हैं। बरामदगी की सूची में 263 किग्रा पैरासिटामोल पाउडर, 2490 किग्रा जिंक पाउडर और हजारों की संख्या में Oxalgin-DP जैसी प्रतिबंधित व नकली गोलियां शामिल हैं। राजकीय लैब की जांच में इन सभी दवाओं के सैंपल पूरी तरह से नकली और मानकों के विपरीत पाए गए हैं।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से लोकेश गुलाटी का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ हरिद्वार के गंगनहर थाने में पहले से ही नकली दवाओं का मामला दर्ज है। एसएसपी अजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में दवाओं के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए एसटीएफ हर संदिग्ध कड़ी की कुंडली खंगाल रही है।
उत्तराखंड एसटीएफ की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने राज्य के दवा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस अब उन मेडिकल स्टोरों और सप्लायर्स की पहचान करने में जुटी है, जो इस गिरोह से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि दवा खरीदते समय QR कोड और पैकेजिंग की सावधानीपूर्वक जांच जरूर करें।
