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केदारनाथ धाम की रूप छड़ी और मुकुट गायब होने का सच: रावल ने दी सफाई
केदारनाथ धाम की रूप छड़ी और मुकुट को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रम पर रावल भीमाशंकर लिंग ने तोड़ी चुप्पी। जानें क्या है सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा।
केदारनाथ: रूप छड़ी और मुकुट गायब होने की खबरें महज अफवाह, रावल ने परंपराओं का हवाला देकर दी सफाई
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम के प्रतिष्ठित धार्मिक प्रतीकों—रूप छड़ी और मुकुट—के गायब होने को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर रावल भीमाशंकर लिंग ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताते हुए कहा कि केदारनाथ धाम की परंपराएं अत्यंत प्राचीन हैं और इनका निर्वहन नियमों के तहत ही किया जा रहा है। रावल के इस स्पष्टीकरण से पिछले कई दिनों से जारी असमंजस की स्थिति अब साफ हो गई है।
रावल भीमाशंकर लिंग ने बताया कि वीरशैव लिंगायत धर्म की पांच प्रमुख पीठों—रामभपुरी, उज्जैनी, केदार, श्रीशैल और काशी—में केदार पीठ का विशेष महत्व है। उखीमठ स्थित केदार पीठ को ‘वैराग्य पीठ’ कहा जाता है, जहाँ की परंपराएं युगों पुरानी हैं। इन परंपराओं के अनुसार, धर्म प्रचार और धार्मिक आयोजनों के लिए रावल को रूप छड़ी, मुकुट और अन्य पवित्र सामग्री अपने साथ ले जाने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
स्पष्टीकरण में कहा गया कि शीतकाल के दौरान, जब भगवान केदारनाथ के कपाट बंद होते हैं, तब उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में मुकुट धारण करने की परंपरा निभाई जाती है। इसी क्रम में, फरवरी 2026 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित शिव कथा और विश्व शांति यज्ञ में इन प्रतीकों को ले जाया गया था। रावल ने याद दिलाया कि वर्ष 2016 में भी इसी तरह के आयोजन में इन प्रतीकों का उपयोग किया गया था, जो परंपरा का हिस्सा है।
उन्होंने आगे बताया कि फरवरी माह में रूप छड़ी की विधिवत साधना की गई और कार्यक्रम संपन्न होने के बाद इसे नियमानुसार वापस जमा कर दिया गया है। रावल ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों के फैलाई जा रही बातों पर विश्वास न करें। केदारनाथ मंदिर समिति और रावल प्रशासन इन अमूल्य धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा और परंपराओं के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
