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हल्द्वानी: व्लॉगर ज्योति अधिकारी की बढ़ी मुश्किलें, पति समेत 11 पर दंगा भड़काने का केस

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हल्द्वानी की विवादित व्लॉगर ज्योति अधिकारी और उनके पति पर काठगोदाम पुलिस ने दर्ज किया 8वां मुकदमा। दंगा भड़काने की साजिश और मारपीट का आरोप। जानें क्या है पूरा मामला।

हल्द्वानी: उत्तराखंड की चर्चित व्लॉगर ज्योति अधिकारी एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंस गई हैं। काठगोदाम कोतवाली पुलिस ने ज्योति अधिकारी, उनके पति गोपाल अधिकारी और उनके मुंहबोले भाई कमल जोशी समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। ज्योति पर आरोप है कि उन्होंने नैनीताल रोड स्थित एक दुकान में न केवल तोड़फोड़ की, बल्कि दंगा भड़काने की साजिश भी रची।
घटनाक्रम के अनुसार, जोशी कॉलोनी निवासी व्लॉगर सुनीता भट्ट ने पुलिस को तहरीर दी थी। सुनीता का आरोप है कि बुधवार शाम जब वह अपनी दुकान ‘वुडपेकर’ पर मौजूद थीं, तब ज्योति अधिकारी अपने साथियों के साथ वहां पहुंचीं। आरोप है कि आरोपियों ने सुनीता के साथ मारपीट की, दुकान का सामान तोड़ दिया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। सुनीता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनकी 7 साल की मासूम बेटी को उठाने की धमकी दी है।
काठगोदाम के एसओ विमल मिश्रा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्योति अधिकारी और उनके साथियों के खिलाफ धारा 115(2), 191(2), 324(4) और 351(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी नामजद आरोपियों को कोतवाली बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। यह ज्योति अधिकारी पर पिछले तीन महीनों के भीतर दर्ज होने वाला आठवां मुकदमा है।
उल्लेखनीय है कि ज्योति अधिकारी पहले भी विवादों में रही हैं। उन पर पहाड़ की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने और देवी-देवताओं पर अनर्गल बयानबाजी के आरोप में कुमाऊं के विभिन्न थानों में केस दर्ज हैं। इन मामलों में वह सात दिनों तक हल्द्वानी जेल में भी रह चुकी हैं। गुरुवार को जब उन्हें कोतवाली से छोड़ा गया, तो उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें वह बेखौफ अंदाज में बाहर आती नजर आ रही थीं।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई पुरानी रंजिश या सोशल मीडिया की आपसी खींचतान है। स्थानीय लोगों में व्लॉगर्स के बीच बढ़ते इस हिंसक टकराव को लेकर काफी आक्रोश है। पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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