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उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार: नवरात्र में धामी कैबिनेट में शामिल होंगे 5 नए चेहरे!

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उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज है। नवरात्र के दौरान 5 रिक्त पदों को भरे जाने की संभावना है, जानें क्या है पूरी योजना।

देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर पुष्कर सिंह धामी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। माना जा रहा है कि इस शुभ नवरात्र के दौरान ही कैबिनेट विस्तार की कवायद को अंजाम दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों के अनुसार, अगले विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम का समय बचा है। ऐसे में सरकार मंत्रिमंडल के रिक्त पांचों पदों को जल्द से जल्द भरने की तैयारी में है।
बता दें कि साल 2022 में जब भाजपा दोबारा सत्ता में आई थी, तब मुख्यमंत्री धामी सहित कुल नौ मंत्रियों ने शपथ ली थी। संवैधानिक नियमों के अनुसार, उत्तराखंड मंत्रिमंडल में अधिकतम 12 सदस्य हो सकते हैं। अप्रैल 2023 में मंत्री चंदन रामदास के निधन और पिछले साल प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद मंत्रियों की संख्या घटकर केवल सात रह गई है। रिक्त पदों को भरने के लिए अब दबाव बढ़ रहा है।
राज्य सरकार के पिछले चार साल के कार्यकाल में कई बार विस्तार की चर्चाएं हुईं, लेकिन वे कभी धरातल पर नहीं उतरीं। इस बार भाजपा संगठन और सरकार दोनों ही गंभीर नजर आ रहे हैं। पार्टी के भीतर नए चेहरों को मौका देने और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर मंथन चल रहा है। आगामी चुनाव को देखते हुए यह विस्तार सरकार की छवि और कार्यक्षमता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा की उत्तराखंड इकाई के मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने पुष्टि की है कि इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार एक शासकीय प्रक्रिया है और जल्द ही रिक्त पद भर दिए जाएंगे। चौहान के अनुसार, धामी सरकार विकास और सुशासन के प्रति पूरी तरह संकल्पबद्ध है। केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलते ही शपथ ग्रहण की तिथि घोषित हो जाएगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्रिमंडल में नए मंत्रियों के आने से विभागों के कामकाज में तेजी आएगी। साथ ही, नाराज विधायकों को साधने और जातीय समीकरणों को संतुलित करने में भी मदद मिलेगी। अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं कि कब नए मंत्रियों के नाम पर आधिकारिक मुहर लगती है। नवरात्र का समय इस बड़े राजनीतिक बदलाव के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।

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