अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
जागेश्वर धाम में अब हथियार और कैमरा बैन: एएसआई ने लागू किए सख्त नियम
जागेश्वर मंदिर में विवाद के बाद ASI ने असलहा और कैमरा ले जाने पर रोक लगाई। ड्रोन, ट्राइपॉड और सूर्यास्त के बाद प्रवेश पर भी पाबंदी। पढ़ें नई गाइडलाइंस।
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के प्रसिद्ध जागेश्वर मंदिर की सुरक्षा और धार्मिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने कड़े कदम उठाए हैं। अब मंदिर परिसर के भीतर किसी भी प्रकार के शस्त्र (असलहा) और कैमरा ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। एएसआई ने मंदिर परिसर में आधिकारिक सूचना बोर्ड लगाकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इन नए नियमों के प्रति आगाह कर दिया है। इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
हाल ही में बरेली के जिलाधिकारी के गनर द्वारा असलहे के साथ जागेश्वर धाम के गर्भगृह में प्रवेश करने पर भारी विवाद हुआ था। स्थानीय लोगों और पुजारियों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई थी और सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की मांग की थी। जनता के आक्रोश और मंदिर की पवित्रता को देखते हुए अधीक्षण पुरातत्वविद् (देहरादून मंडल) ने यह आदेश जारी किया है। अब मंदिर के भीतर मोबाइल ट्राइपॉड, गिम्बल, ड्रोन कैमरा या सामान्य कैमरा बिना पूर्व अनुमति के ले जाना वर्जित होगा।
एएसआई द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, केवल कैमरों पर ही नहीं बल्कि परिसर के भीतर अन्य गतिविधियों पर भी अंकुश लगाया गया है। मंदिर परिसर में अब किसी भी प्रकार की पार्टी, शादी समारोह, बैठक या सम्मेलनों का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, नशीले पदार्थों का सेवन कर प्रवेश करना और पालतू जानवरों को साथ लाना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि मंदिर केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए है।
प्रशासन ने मंदिर में प्रवेश के समय को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। अब श्रद्धालु केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही परिसर में प्रवेश कर सकेंगे। सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। जानकारों का मानना है कि इन स्पष्ट नियमों से श्रद्धालुओं के बीच की भ्रम की स्थिति दूर होगी। अक्सर अनजाने में पर्यटक ऐसी गलतियां कर बैठते थे, जिससे मंदिर की परंपराओं को ठेस पहुंचती थी, लेकिन अब बोर्ड लगने से अनुशासन कायम रहेगा।
इस फैसले का स्थानीय निवासियों और तीर्थ पुरोहितों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि जागेश्वर धाम एक अत्यंत संवेदनशील और प्राचीन पुरातात्विक स्थल है, जिसकी सुरक्षा सर्वोपरि है। नए नियमों के लागू होने से न केवल मंदिर की भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण भी मिल सकेगा। प्रशासन ने पर्यटकों से सहयोग की अपील की है ताकि देवभूमि की परंपराएं सुरक्षित रह सकें।
